Tuesday, October 29, 2024
प्यार की धार को जीवन का प्राणाधार कर दो तुम,
नज़र के तीर को..मेरे जिगर के पार कर दो तुम।
कई जन्मों के..गूंगे भाव..जो मन में समाए हैं,
उन्हें वाणी का रस देकर मेरा उद्धार कर दो तुम।
अधर प्यासे हैं सदियों से जाएगा कब अधूरापन,
बहार बन कर छा जाओ मधुर बौछार कर दो तुम।
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
Sunday, October 27, 2024
ज़िंदगी मुश्किल बड़ी पर मुस्कुराना सीख ले
ये नहीं मुश्किल तू सबको ये बताना सीख ले
आयेंगी यहाँ आँधियाँ तूफ़ान भी हर राह में
पर अडिग हो राह में तू जीत जाना सीख ले
पलकों के कोरों में तू आँसू छिपाना सीख ले
ज़िंदगी छोटी बहुत पर गुन गुनाना सीख ले
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
Tuesday, October 22, 2024
हिम्मतसे बढ़ती है ताकत
एकजुटता से बढ़ती एकता
प्यार बढ़ता साझा करनेसे
परवाह से बढ़ती एकरूपता
छू ना पायेगा कोमल हृदय
किसीके भी कठोर शब्द
छू जाएंगे कठोर हृदयभी
हँसमुख तेरे कोमल शब्द
पढ़सकते हो तो दर्द पढ़ना
किसीके भी दिलके भीतर
शान्त सा दिखने वाला लगे
कितने दर्द समेट रखे हमने
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
Sunday, October 20, 2024
राधा के होंठ
गुनगुनाते फाग
बांसुरी मौन।
राधा का गीत,
नाच रहे मोहन,
कुंज दें ताल।
प्रेम का रंग,
राधा और मोहन,
एक रंगे हैं।
कृष्ण रंग हैं,
गोरी राधारानी जी,
श्याम हो गईं।
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
Saturday, October 19, 2024
मेरी बंदगी बस तुम्हीं हो फ़क़त
तेरे नाम ये ज़िन्दगी हो फ़क़त
न जाऊं कहीं इश्क़ की आस में
अगर साथ ये आशिक़ी हो फ़क़त
सितारों नज़र तुम न आना अभी
हमें आरज़ू चाॅंदनी हो फ़क़त
बुलाओ बहारों मेरे यार को
के इस बाग़ में दिल्लगी हो फ़क़त
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
Wednesday, October 16, 2024
धड़कती धड़कनें भी रहीं उदास कल रात।
झपकती पलकों में था इक क़यास कल रात।
सुलगते रहे सपने आँखों में भोर तलक,
थपथपाती रही खिड़की बरसात कल रात।
उनसे कल रात ना हो सकी गुफ्तगूँ,
झरझराती रहीं बूंदें चुपचाप कल रात।
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
Sunday, October 13, 2024
ढलती शाम सी जिंदगी है तुम बिन मेरी,
कुछ पल साथ दो तो यादों में उतर जाऊं।
मेहमान हूं बस कुछ ही दिनों का मैं तेरा,
साथ बैठो तो कुछ पल ही मैं संवर जाऊं।
मिलते है मुश्किलों से अरमान दिल के कभी,
अरमान है कि आज एक शाम ही ठहर जाऊं।
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
Friday, October 11, 2024
कुछ कहते है नयन तुम्हारे
जब वह झुके झुके होते
हम भी समझे उस भाषा को
आंसू खूब रुके होते।।
झर झर बहते आंसू जब
नयनो को खूब भिगोते है
खुशी अगर हो या फिर गम हो
हर पल में ही रोते है ll
सपने देखे सुंदर सुंदर
देखे पर सोते सोते
कुछ कहते है नयन तुम्हारे
जब वह झुके झुके होते।।
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
Monday, October 7, 2024
त्रिकुटी बीच बिंदु शोभित
ठगें से दो नयन!
उलझ रहे पिय नयन से
लज्जित होकर मौन!!
तुम जीवन अभिसार सखी
रूप अनूप सहचरी सी!!
पग कोमल कोमल हृदय
मुदित मन पिय घर चली!!
नयन मीन भौह अति सुंदर
जिसमें राजित पिय की मूरत!!
अधर सुधारस ऐसे पागे
मधुशाला की सुरा से लागे! !
~~~~ सुनील #शांडिल्य
Friday, October 4, 2024
हुआ प्यार मुझको,ये वो जानती है,
मोहब्बत को लेकिन,वो नही मानती है
वो मोहक अदा से,सितम ढ़ा रही हैं
कटि की लचक से,मुझे लचका रही है
घट भर जल रख,प्यास बढ़ा रही है
घट नीर पिऊँ,या नैनो की मदिरा
समझ मुझको लेकिन,नही आ रही है
बस बस कर, अब बस भी करो जी
ये अवरोध दिन रात,देती जा रही है
~~~~ सुनील #शांडिल्य
Wednesday, October 2, 2024
जिश्म की तुम मेरी कोई
अनमिट कहानी नहीं हो
आँखों से हुई तुम मेरी कोई
सुन्दर नादानी नहीं हो
अल्ल्हड़, मदमस्त सरित सी
बहती रवानी नहीं हो
आँखों से बरसता हुआ
प्रेम का तुम पानी नहीं हो
तुम मेरे जीवन का वसंत हो
पतझड़ की निशानी नहीं हो..!!!
~~~~ सुनील #शांडिल्य
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