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Thursday, May 5, 2016

यूं तो हम ज़माने से कब किसी से डरते हैं
आदमी के मारे हैं, आदमी से डरते हैं
जब न होश था हमको, तब दुश्मनी से डरते थे
अब होश आया है तो, दोस्ती से डरते हैं
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खुमार बाराबंकवी

Friday, February 19, 2016

क्या हुआ हुस्न हमसफ़र है या नहीं,
इश्क़ मन्ज़िल ही मन्ज़िल है रास्ता नहीं |
-ख़ुमार बाराबंकवी