उठ कर तो आ गए हैं तेरी बज़्म से मगर, कुछ दिल ही जानता है किस दिल से आये हैं |
- फैज़
Thursday, June 16, 2016
इश्क का सर-ए-निहां जां-तपन है जिस से आज इकरार करें और तपिस मिट जाए हर्फ़-ए-हक़ दिल में खटकता है जो कांटे की तरह आज इज़हार करें और खलिश मिट जाए
-फैज़ अहमद फैज़
Tuesday, June 14, 2016
इश्क का सर-ए-निहां जां-तपन है जिस से आज इकरार करें और तपिस मिट जाए हर्फ़-ए-हक़ दिल में खटकता है जो कांटे की तरह आज इज़हार करें और खलिश मिट जाए
-फैज़ अहमद फैज़
Tuesday, March 8, 2016
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के, वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़र के.
- फैज़ अहमद फैज़
Sunday, February 21, 2016
रिन्दों के दम से
आतिश-ए-मै के बग़ैर भी, है मैकदे में आग बराबर लगी हुई.
- फैज़ अहमद फैज़