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Sunday, August 21, 2016

उठ कर तो आ गए हैं तेरी बज़्म से मगर,
कुछ दिल ही जानता है किस दिल से आये हैं |

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फैज़

Thursday, June 16, 2016

इश्क का सर-ए-निहां जां-तपन है जिस से
आज इकरार करें और तपिस मिट जाए
हर्फ़-ए-हक़ दिल में खटकता है जो कांटे की तरह
आज इज़हार करें और खलिश मिट जाए
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फैज़ अहमद फैज़

Tuesday, June 14, 2016

इश्क का सर-ए-निहां जां-तपन है जिस से
आज इकरार करें और तपिस मिट जाए
हर्फ़-ए-हक़ दिल में खटकता है जो कांटे की तरह
आज इज़हार करें और खलिश मिट जाए
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फैज़ अहमद फैज़

Tuesday, March 8, 2016

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के,
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़र के.
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फैज़ अहमद फैज़

Sunday, February 21, 2016

रिन्दों के दम से आतिश-ए-मै के बग़ैर भी,
है मैकदे में आग बराबर लगी हुई.
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फैज़ अहमद फैज़