आशिक़ी सब्र-तलब और
तमन्ना बेताब, दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक.
- मिर्ज़ा ग़ालिब
Wednesday, April 6, 2016
रही न ताकते-गुफ्तार और
अगर हो भी, तो किस उम्मीद पै कहिए कि आरजू क्या है?
-मिर्जा 'गालिब'
अब मैं हूँ और मातम-ए-यक शहर-ए-आरज़ू, तोड़ा जो तू ने आईना तिमसाल दार था.
- मिर्ज़ा ग़ालिब
Tuesday, April 5, 2016
अज़ -मेहर- ता -ब -ज़र्रा दिल -ओ -दिल है आइना तूती को शश -जिहत से मुक़ाबिल है आइना
~मिर्ज़ा ग़ालिब
ये ग़ालिब का बहोत बेहतरीन शेर है। ग़ालिब कहते
है ईश्वर सर्वव्यापी है । सूरज के किरणों से लेकर कण कण में हर जगह उसके ह्रदय की
प्रतिमा है । छः दिशाओं में उसका प्रतिबिम्ब दिखता है जो मनुष्य को उसके होने की
हमेशा याद दिलाता है । अज़ -मेहर- ता -ब -ज़र्रा= सूर्य से लेकर कण तक ;शश -जिहत = छः दिशाएँ
Tuesday, March 29, 2016
आईना क्यूँ न दूँ तमाशा कहे जिसे ऐसा कहाँ से लाऊंकी तुझ सा कहे जिसे । गालिब ' बुरा न मानजो वाइज़ बुरा कहे ऐसा भी कोई हैकी सब अच्छा कहें जिसे ।
Thursday, March 10, 2016
मोहब्बत मे नहीं है फर्क , जीने और मरने का इसी को देखकर जीतें हैं , जिस काफिर पे दम निकले । ग़ालिब
Thursday, February 25, 2016
दिल ही तो है न संग-ओ-खिश्त दर्द से भर न आये क्यों, रोयेंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यों.
- मिर्ज़ा ग़ालिब
बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना, आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सां होना.
- मिर्ज़ा ग़ालिब
Wednesday, February 24, 2016
चन्द तस्वीर-ए-बुताँ चन्द हसीनों के ख़तूत, बाद मरने के मेरे घर से ये सामाँ निकला |
- मिर्ज़ा ग़ालिब
नक्श फ़रियादी है किस की शोख़ी-ए-तहरीर का, कागज़ी है पैराहन हर पैकर-ए-तस्वीर का |
- मिर्ज़ा ग़ालिब
Sunday, February 21, 2016
लिपटना परनियाँ में शोला-ए-आतिश का आसाँ है, वले मुश्किल है हिकमत दिल में सोज़-ए-ग़म
छुपाने की |
- मिर्ज़ा ग़ालिब
साया मेरा मुझसे मिसल-ए-दूर भागे है 'असद', पास मुझ आतिशबजाँ-जान के किस से ठहरा जाए है |
- मिर्ज़ा ग़ालिब
दिल मेरा सोज़-ए-निहाँ से
बेमुहाबा जल गया, आतिश-ए-ख़ामोश के मानिंद गोया जल गया.
- मिर्ज़ा ग़ालिब