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Thursday, June 30, 2016

कोई नई ज़मीन हो नया आसमाँ भी हो,
ऐ दिल अब उस के पास चलें वो जहाँ भी हो |

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फ़िराक गोरखपुरी |

Thursday, February 25, 2016

ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गई तू,
मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे।
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फिराक गोरखपुरी

Wednesday, February 24, 2016

ख़ुदा को पा गया वाइज़ मगर है,
ज़रूरत आदमी को आदमी की.
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फ़िराक़ गोरखपुरी

Sunday, February 21, 2016

आतिश-ए-इश्क भड़कती है हवा से पहले,
होंठ जलते हैं मुहब्बत में दुआ से पहले |
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फिराक़ गोरखपुरी
जैसे लहराए कोई शोला कमर की ये लचक,
सर-ब-सर आतिश-ए-सय्याल बदन क्या कहना |
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फिराक़ गोरखपुरी