Sunday, May 10, 2026

"माँ की आख़िरी 'निशानी'…

मेरे शब्दों में उसकी ममता की परछाईं,
मेरी रगों में उसका साहस,
और मेरी रचनाओं में उसकी दुआओं की गूँज।
मैं एक कवि हूँ—
पर उसके बिना, हर पंक्ति अनाथ-सी लगती है,
जैसे कलम भी उसकी गोद को तलाश रही हो…
.......✍️😥

#शांडिल्य

Monday, May 4, 2026

जब तेरे होंठों पर
वो मधुप्रिया मुस्कान सजी होती है,
तो लगता है जैसे
कायनात का हर रंग 
अपना अस्तित्व खो बैठा हो।

तेरे इस मृदुल हास्य-संगीत पर
प्रकृति भी मानो इतराती है
और शायद!
हंसी की मधुर लहरियों में
फूल भी अपनी सुवास 
जलन में समर्पित कर देते होंगे।

#शांडिल्य

Friday, May 1, 2026


बस दिखावे वाले लोग ही scroll कर देते हैं।
मैं वही लिखता हूँ,
जो कोई जुबाँ से कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।

जो जज़्बात तुम अंदर घुटा देते हो,
मैं उन्हें खुलकर उजागर करता हूँ।

अगर सच में —
अपनी आत्मा को झाँकना चाहते हो…
तो #Follow' करना अब तुम्हारे लिए अनिवार्य है। 🫀

#शांडिल्य

Wednesday, April 29, 2026

एक प्रेमिका के लिए ~
दुनिया की सबसे भरोसेमंद जगह
उसके यार का कंधा होता है…

"कंधा —
सिर्फ हड्डी और मांस का टुकड़ा नहीं,
ये वो ठोस सहारा है जहाँ मोहब्बत 
और भरोसा जम के बैठा होता है।

जब सिर उस पर टिकता है,
तो सिर्फ शरीर नहीं ठहरता....
दिल और आत्मा की सुकून भरी 
जगह भी वहीं मिलती है।

"सोचो—
समाज और दिल की नज़र से देखें,
सच्चा बंधन और अडिग वफादारी
वो ढांचा है जो ज़िन्दगी के उफान भरे समय में
दिल और दिमाग को संभाले रखता है।

इसलिए....."!
कुछ लड़कियों को महल 
या पैसों का झमेला नहीं चाहिए... 
बस वो भरोसा,ठोस सहारा 
और आत्मा की सुरक्षा चाहिए,
जो उन्हें समाज और अपने अंदर 
दोनों में आराम दे।

#शांडिल्य

Monday, April 27, 2026

तू मरीचिका…
मैं मृग, प्यासा और भटका हुआ।
तू अनंत राहों की मंज़िल…
मैं, सिर्फ़ थकी आँखों में तेरा सपना लिए, चलता हुआ।

तू छाया की तरह दूर..
मैं धूप की तरह अकेला।
तू आग की तरह जलती…
मैं राख बनकर तुझ तक पहुँचने की आस में।

#शांडिल्य

Saturday, April 25, 2026

जज़्बातों के पहिए 
अब भी गतिशील होना चाहते हैं,
पर समय की कठोर ग्रंथि ने 
उनकी धुरी को बाँध दिया है।

मन एक रणभूमि है—
जहाँ इच्छा और कर्तव्य,
लालसा और तर्क,
दोनों अपने-अपने अस्त्र उठाए खड़े हैं।

तुम्हें चुनना—
मानो अपनी ही अंतरात्मा को प्रश्नांकित करना,
क्योंकि हर भाव के पीछे.. 
संस्कारों का प्रहरी खड़ा है।

और मैं?
मैं वही कर्ण हूँ—
जिसकी चेतना वचनबद्ध है,
पर हृदय अब भी उस निषिद्ध तृष्णा से ग्रसित है
जिसे पाने का स्वप्न ही एक अपराध लगता है।

#शांडिल्य

Thursday, April 23, 2026

ओय....सुन...'!
"क़रीब आओ...
कि आँखों की तहरीर में उतर जाओ,
इन बेचैन साँसों में समा जाओ...
कौन है जो दिल की दस्तक पर राज करे?
तुम्हीं बताओ, तुमसे मोहब्बत ना कौन करे?
प्यासे लम्हों को भी तो शबनम चाहिए,
और हमें...
बस तुम्हारा संग चाहिए..." ♥️🧡

#शांडिल्य

Friday, April 17, 2026

"जो अग्नि जीवन को रोशन करती है,
वही एक दिन राख बनकर
सन्नाटे में अपना ``गीत`` गाती है।

जलता हुआ केवल 'शरीर' नहीं,
जलता हुआ इतिहास है"— 
जिसमें प्रेम की धधक, हँसी की किरणें" ..............!
और आँसुओं की नर्म बारिश समाई है।

यह धुआँ सिर्फ़ आसमान की ओर नहीं उड़ता,
यह उन यादों को भी साथ ले जाता है,
जो समय की लकीरों पर कभी मिट नहीं सकतीं।

मृत्यु केवल विराम है ,पूर्णविराम नहीं.....।
~"क्योंकि
यहाँ छोड़ा गया प्रेम
अनंत काल तक गूँजता रहता है—
हर धड़कन में, हर हवा में, 
हर अधूरी मुस्कान में।

#शांडिल्य

Wednesday, April 15, 2026

**"ए सुनो...
तुम्हें कभी लगा है,
प्रेम सिर्फ भावना नहीं—
वह तो अस्तित्व की व्याख्या है?
"तुम वह शून्य हो,
जहाँ शब्द समाप्त होते हैं और 
मौन अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचता है।

तुम्हारी दृष्टि...
मानो उपनिषदों की अनंत पहेलियाँ,
जिन्हें सुलझाने में बुद्धि भी संन्यास ले ले।

तुम्हारी मुस्कान—
जैसे वेदांत का वह मंत्र,
जो दुख की जड़ तक पहुँचकर
मुक्ति का आलोक जगा दे।

और तुम्हारे अधर...
स्मरण मात्र से ही
मेरा चित्त समाधि में डूब जाता है।
तुम स्वप्न नहीं,
तुम वह ब्रह्म-सत्य हो,
जिसे मेरी प्रत्येक प्राणवायु 
श्रद्धया स्वीकार करती है।

ए सुनो...
यदि तुम मेरी निस्तब्धता 
पढ़ सको,तो जानोगी—
मैं सिर्फ प्रेम नहीं करता,
मैं तुम्हारे होने के कारण 
अपने होने का अर्थ समझता हूँ।

#शांडिल्य

Sunday, April 12, 2026

—ए सुनो....🫀
"तुम्हारा पहला स्पर्श..
~जैसे अनंत नीरवता में पहली नाद की तरंग।
उस क्षण मेरे भीतर का हर शून्य भर गया—
ना शरीर ने जाना, ना इंद्रियों ने,
पर आत्मा ने एक अनाम बंधन में खुद को बाँध लिया।

क्योंकि"~
 प्रेम स्पर्श का विषय नहीं है,
वह चेतना की गोद में पलने वाला नाद है।
देह की सीमाएं "जहाँ समाप्त होती हैं,
वहाँ यह बंधन अपनी अनंत जड़ें जमाता है।

और तब समझ आया—
तू मुझसे अलग नहीं,
तू मेरी हर श्वास का अप्रकट स्वर है,
जिसे न वियोग तोड़ सकता है, न मृत्यु।
क्योंकि यह प्रेम देह का नहीं, अमृत चेतना का संधान है।

#शांडिल्य

Wednesday, April 8, 2026

प्रेम में पुरुष...........'
स्त्री की छाती से चिपककर शिशु बन जाता है।

~और स्त्री.....'''
माँ की सतर्कता लिए हर विषम को 
अपने हृदय में अवशोषित करती है,
ताकि उसका पुरुष निर्भीक और सुरक्षित रहे। 
❤️🫀🤌

#शांडिल्य

Tuesday, April 7, 2026

-- ओये सुनो !!!!!!

प्रेम केवल हृदय की धड़कन नहीं,
यह चेतना की अदृश्य रसायन-क्रिया है,
जहाँ...."" तुम्हारे....'
झुमकों की झंकार मेरी स्मृतियों में प्रतिध्वनित होती है,
हर झूलन में कोई अधूरी कविता,
हर कंपन में कोई अनलिखा इतिहास..." 🧡❤️

#शांडिल्य

Sunday, April 5, 2026

"आज की तरह....."
मैं कल भी हमेशा तुम्हारा फ़ोटोग्राफ़र रहूँगा।
तुम्हारी हर मुस्कान, हर नज़र, हर ख्वाब,
मेरे भीतर की हर भावना में संजोकर रखूँगा।
हर जन्म, हर सृष्टि में, सिर्फ़ तुम्हारा साथ पाना~
मेरे मन का यह गहरा, अटूट वचन है" ♥️💛"

#शांडिल्य

Saturday, April 4, 2026

प्रेयसी कहती है—
मुझे सीता की तरह चाहो,
= "मैंने कहा—
तुम्हें राम की तरह खो भी सकता हूँ?
वो चुप रही..."
~क्योंकि ""
आधुनिक प्रेम में वियोग का साहस नहीं होता!"

❤️🧡

#शांडिल्य

Tuesday, March 31, 2026

जीवन का "अवसाद" कभी भी स्थायी नहीं,
हर 'संघर्ष' में छिपा होता है 'अमूल्य' त्राण।
जो धैर्य से कष्टसाध्य पथ पर चल पड़ता है,
वही अप्रमेय विजय का स्वाद चखता है।

असफलता केवल एक क्षणिक परावर्तन है,
नहीं तो हर क्षण में संपूर्णता के बीज अंकुरित होते हैं।
आज का अस्थिरतम क्षण कल का 
अतुलनीय गौरव बन जाता है।

तो चलो,
अविचलित इच्छाशक्ति  के साथ उठो,
और उस अज्ञात शिखर को छू लो,
जहाँ केवल वही पहुँचते हैं,
जो अपने संकल्प  को अद्वितीय 
अग्नि में परिवर्तित कर देते हैं।

#शांडिल्य

Monday, March 30, 2026

छोटे कदमों की मासूमियत
बड़े कदमों की छाया में....
"हर रात की सैर भी
एक अनकही दास्तान बन जाती है।

प्यारी जैकेट में
वह नन्हींआत्मा " और
उसके साथ चल रहा..." वह कोई—
जैसे जीवन की सुरक्षा और प्रेम
हमेशा साथ-साथ चलते हों , 
शायद यही है जीवन का सच्चा गीत। 
💛🌼♥️

#शांडिल्य

Saturday, March 28, 2026

"ए सुनो.....
तुम्हारी मुस्कान—
एक दैवीय संगीत बनकर
मेरे शब्दों की तहों में उतरती है।

तुम्हारी हर बात,
जैसे अदृश्य मृगमरीचिका,
मन के गहरे कुंड में सिहरन जगाती है।

और मैं........
असमंजस और सम्मोहित,
सिर्फ तुम्हारे होने का अनुग्रह गिनता हूँ।

शब्द यहाँ विफल हैं—
पर तुम्हारे नयनों की गूँज,
मेरे चेतन में अनन्त काव्य बनकर
धड़कती रहती है। 

#शांडिल्य

Monday, March 23, 2026

इन हथेलियों की लकीरों में
सिर्फ आटा नहीं,
रिश्तों की गहराई गूँथी जाती है।
लकड़ी की हर चोट, जैसे कोई प्राचीन मंत्र,
धरती के सीने से उठता—
मेहनत का संगीत, और उत्सव का स्वर।
यह चक्की नहीं,
समय का चक्र है"
जहाँ परंपराएँ पिसती हैं,
और प्रेम अनन्त रोटी बनकर
पीढ़ियों को तृप्त करता है.♥️

#शांडिल्य

Friday, March 20, 2026

सुनो—
जब तुम गुस्सा होती हो,
तो लगता है जैसे
रात का चाँद अपनी रोशनी भूल गया हो,
नदियाँ अपने किनारे छोड़ गई हों
और ऋतुएँ अपनी पहचान खो बैठी हों।

तुम्हारे गुस्से से
मेरी ज़िंदगी की सारी कड़ियाँ
एकदम बिखर जाती हैं
मत करो यूँ मुझसे रूठने की सज़ा,
ये दिल तुम्हारी मुस्कान का बंदी है।

#शांडिल्य

Tuesday, March 17, 2026

इस शाम की हवा में हल्की-सी ठंडक है,
कपों से उठती भाप में कहानियाँ तैर रही हैं,
और सामने ये तख़्ती—
~[ मैं तुम और चाय ]~ 
मानो रिश्तों का सबसे सच्चा फ़लसफ़ा कह रही हो।

कितनी अजीब बात है ना...
ज़िन्दगी के बड़े-बड़े सपनों को छोड़कर
बस एक कप चाय और तुम्हारी मौजूदगी...
कितनी क़ीमती लगती है।

शामें इसलिए 'ख़ूबसूरत' नहीं होतीं
कि सूरज ढल रहा है...
बल्कि "!  इसलिए कि ~
किसी के साथ चाय का वक़्त
दिल के अंदर तक गर्माहट पहुँचा देता है।

"तुम, मैं और ये चाय—
किसी भी किताब का सबसे प्यारा इश्क़ लगता है।

#शांडिल्य

Friday, March 13, 2026

ओये सुनो ...
यह 'अनंत ब्रह्मांड' का आलिंगन भी
तुमसे मिलन की आस में तपता है—

दिन की उजली करनें,
दोपहर की धधकती प्रार्थनाएँ, 
रात की समाधि-सी ख़ामोशी तक 
तेरा नाम मंत्रवत जपती हैं।

मेरे द्वार की चौखट पर
हल्दी-कुमकुम से अंकित स्वस्तिक
अब भी अधूरी है—

तुम्हारी हथेलियों की आभा
और उस दिव्य लम्स के बिना...
और वो आँगन...

तुलसी की मंजरियाँ रोज़ प्रश्न करती हैं—
कब बरसेगा तेरे चरण-स्पर्श का अमृत,
जिससे यह मृतप्राय मिट्टी 
फिर से प्राण-शक्ति से उद्भासित हो सके...।  

#शांडिल्य

Tuesday, March 10, 2026

ओए सुनो ~
तुम्हारे साथ हर क्षण, एक दिव्य अनुभूति है…
जैसे समय अपने पंख समेट ले, 
और अंतरिक्ष भी केवल एक फुर्तीली झिलमिलाहट बने।
तुम्हारे आलिंगन में सारी सीमाएँ, सारे बंधन, 
रूह की गहराइयों में विलीन हो जाते हैं।
सिर्फ तुम और मैं,और वो अनन्त शांति
जो आत्मा के कोष में सदा प्रतिध्वनित होती है।
हर श्वास में तुम्हारा प्रतिबिंब, 
हर धड़कन में तुम्हारा सुकून।
तुम केवल कोई अस्तित्व नहीं, 
तुम मेरी रूह का परम अनुभव हो। 

#शांडिल्य

Friday, March 6, 2026

"ए सुनो...
मेरी आत्मा तुम्हारी आत्मा से बंधी है,
हर सांस में तुम्हारी मौजूदगी है।
एक पूरी ज़िंदगी तुम्हारे साथ जीनी है—
सिर्फ तुम्हारा बन कर,
हर पल, हर क्षण, हर दिन, हर जीवन…
तुम्हारा होना मेरी प्रार्थना है,
तुम्हारा होना मेरी साधना।
मेरी दुनिया तुम्हारे भीतर बसी है,
मेरी आत्मा हमेशा तुम्हारे साथ" 

#शांडिल्य

Tuesday, March 3, 2026

~ए सुनो...
बस इतना सा ख्वाब.....'
रात अपनी अंतिम साँसों में है...
और तुम,मेरे इतने समीप कि
मैं तुम्हारी हर धड़कन को 
अपने हृदय में लिख सकूँ।

"तुम्हारी आँखों में बहती गंगा
मानो मेरे पापों का प्रक्षालन कर रही हो, 
और मैं उस जलधारा के संग
एक अदृश्य गीत गुनगुना रहा हूँ 
गीत, जो केवल आत्माएँ सुनती हैं।

बहुत रात बीत चुकी...
आओ "अब मैं तुम्हें निद्रा के आँगन में उतार दूँ,
जहाँ पवन अपनी तंत्री पर अमृतमयी लोरी छेड़े,
और समय थम जाए हमारे बीच की 
इस मौन उपासना पर..." 

#शांडिल्य

Thursday, February 26, 2026

सुनो.....
भाग्यवान,
प्रेम में कोई क्षणभंगुर फूल नहीं दूँगा,
बस एक ऐसा फूल अर्पित करूँगा,
जो साधारण हो,
परन्तु अनन्त की महक लिए हो।

ठीक वैसे ही,
जैसे मेरी आत्मा तेरी चेतना में 
विलीन होना चाहती है,
तेरी कटि को थामना नहीं,

तेरे अस्तित्व को अपने अन्तर्मन में 
धारणा करना चाहती है..
क्योंकि तू केवल मेरी इच्छा नहीं—
तू मेरी प्रार्थना है,
मेरा मंत्र, मेरा मोक्ष।

#शांडिल्य

Tuesday, February 24, 2026

हे ईश्वर ~
मुझे ऐसा जीवन अर्पित कर,
कि उसके संग बिताया हर क्षण 
मेरी आत्मा और मन के लिए अनंत हो जाए —

ना उसकी हँसी देखे बिना मेरी प्राणधारा ठहरे,
ना उसके बिना जीने की 
कोई मानसिक या आध्यात्मिक वजह बचे......

मेरा मन स्थिर और सन्तुलित हो,
उसके प्रेम में मेरी चेतना 
हर पल गहराई से जुड़ी रहे।

मेरी सोच,
मेरी संवेदनाएँ, मेरी आत्मा —
सब उसके प्रकाश और 
प्रेम में विलीन हो जाएँ। 

#शांडिल्य

Wednesday, February 18, 2026

मेरे शब्दों के आँगन में,
एक दुल्हन सजी है—
जो न किसी की साँझा है,
न कहीं और की परछाई।

ये दुल्हन...
मेरे मन की एकांत स्मृतियों में बसती है।
मेरे लफ़्ज़ों के कंगन,
मेरे ख़यालों की चुनरी ओढ़े—
मैं लिखता हूँ तो वो मुस्कुराती है।

हाँ...
मेरी लेखनी ही मेरी दुल्हन है।"

#शांडिल्य

Monday, February 16, 2026

सुनो—

कितना अजीब है न…
कुछ लम्हे सिर्फ़ पीठ दिखाकर भी 
दिल के सबसे गहरे राज़ कह देते हैं।
तुम्हारे लाल लिबास में 
ढला ये सांझ का रंग,
जैसे कोई अधूरी कहानी,
जो सिर्फ़ आँखों से लिखी गई हो—
बिना एक भी लफ़्ज़ कहे। 

#शांडिल्य

Friday, February 13, 2026

ए सुनो —
न मेरे पास सोने के ख़ज़ाने हैं,
न वैभव के महल…
पर हाँ—
एक वचन है मेरे पास, "कि
मैं तुम्हारे संग रहूँगा जीवन की हर आँधी 
और हर बहार में।
चाहे थकान हो
सिक्के-सिक्के की कमाई में,
या राहों का काँटों भरा सफ़र
मैं तुम्हारे साथ ही चलता रहूँगा,
जब तक दिल की बहत्तरवीं धड़कन
अपना आख़िरी गीत तुम पर अर्पित न कर दूँ। 

#शांडिल्य

Monday, February 2, 2026

ए सुनो…

सातवें फेरे का वह क्षण—
जहाँ समय भी धीरे-धीरे सांस लेता है,
हवा में सिर्फ़ तुम्हारी खुशबू है,
और मेरी धड़कन में सिर्फ़ तुम्हारे नाम की आहट।
साड़ी की लहर में झिल मिलाता चाँद,
माथे की बिंदी में बसता सवेरा,
मांग का कुमकुम हमारे वादों का लालिमा युक्त साक्षी... 
और हाथों की गरमी “दो आत्माओं का अनंत मिलन”।
अब हम केवल दो नहीं,हम एक हैं
एक ऐसी धुन में बँधे हुए,
जिसे समय ही नहीं, सिर्फ़ प्रेम ही समझ सकता है।

#शांडिल्य

Sunday, February 1, 2026

मुझे फ़क़त "समझदार" कहकर फिर समझाया जाएगा,
मुझे विदित है मेरे 'भाग्य-पत्र' में फिर से "समझौता" आएगा।। 

#शांडिल्य

Thursday, January 29, 2026

बारिश की बूंदें याद कर रही तुझे
तेरे एहसासों की याद दिला रही मुझे

बेबस निगाहें याद कर रही तुझे
सुनी बांहे मेरी याद कर रही तुझे

दर्द है गम है जाने क्या क्या है मुझमें
सबसे खास है तेरी कमी खल रही मुझे

अहसास का समंदर उमड़ा पड़ा है अंदर
तेरी पनाहों की जरूरत अब हो रही मुझे।

#शांडिल्य

Tuesday, January 20, 2026

पतझड़ आते ही रहते हैं..
की मधुबन फिर भी खिलते !!
फूलों की महक से भ्रमर ललचाए!

रेत के नीचे  जल की धारा!!
हर सागर का यहाँ किनारा!!
रातों के आँचल में.. छुपा है सूरज प्यारा !

मैं बन जाऊं  नज़र तुम्हारी..
दे दो मुझको  ज़िम्मेदारी!!
तुम मेरी आँखों से.. देखो दुनिया सारी!!

#शांडिल्य

Monday, January 19, 2026

जुबां मौन है पर नजर बोलती है,
दबे दिल के राज सहज खोलती है ।

कभी पास बैठो निहारो इन नजर को,
ए बिना शब्द के भी गजब बोलती है ।

निहारोगे जितना इन आंखो मे मेरी,
मुहब्बत मे उतना ए शहद घोलती है ।

शब्दो को अधरों पर कभी तुम न लाना,
सुनना और कहना जो नजर बोलती है। 

#शांडिल्य

Saturday, January 17, 2026

कवि की प्रेयसी, स्वप्नों की मूरत,
कल्पनाओं में बसी, भावों की सूरत।

शब्दों की गहराई, मंद मौन मुस्कान,
धड़कनों में बसी, अनजानी पहचान।

कभी चांदनी में, कभी घटाओं में,
बसती है वह मन की गहराइयों में।

अनकही बातों का सजीव चित्रण,
उसके बिना अधूरा कवि का सृजन।

#शांडिल्य

Saturday, January 10, 2026

मुझसे तुम्हारी ताल्लुकात पुराना है 
मुलाकातों का सिलसिला याराना है .!! 

दरमियान न कोई रिश्ता छुपाया है 
खुली किताब की तरह सामने रखा है .!! 

उस सोच से परे जिस सोच में दुनियां है 
दरमियान आंखो में कहानी एक अफसाना है .!! 

#शांडिल्य

Tuesday, January 6, 2026

मैं लिखता हूँ कि मुझे लिखना नहीं था,  
शब्द मेरी नसों में अंधकार की धाराएँ बन गए।  
मैं जीता हूँ कि मुझे जीना नहीं था,  
हर साँस मुझे शून्य की ओर धकेलती रही।  

मैं मरता हूँ कि मुझे मरना नहीं था,  
मृत्यु भी मेरी प्रतीक्षा में थक गई।  
मैं थक गया था खुद से हार कर,  
हार ने मुझे अपनी ही परछाई बना लिया।  

मैं जो हूँ,वो मेरी चाह का प्रतिबिंब नहीं,  
मैं जो बन गया,वो मेरी भूल का परिणाम नहीं।  
मैं बस एक शून्य हूँ,
जिसमें सवाल और जवाब दोनों ही डूब चुके हैं।  

#शांडिल्य

Saturday, January 3, 2026

जीवन संसार सागर में
प्रेम व दोस्ती की जलतरंग है। 
दोनों से जीवन में खुशहाली 
नहीं तो फीका बदरंग है। 
प्रेम में है आकर्षण
तो समर्पण दोस्ती का भाव है। 
प्रेम हिलोरती लहरें तो 
दोस्ती का साहिल स्वभाव है। 
प्रेम और दोस्ती में
भेद जरा मुश्किल है। 
प्रेम ढूंढता तन्हाई 
तो दोस्ती सजाती महफ़िल है। 

#शांडिल्य

Thursday, January 1, 2026

ख़ामोशी के इस समंदर में,
लफ़्ज़ भी अक्सर डूब जाते हैं।
दर्द की धूप में तपकर ही तो,
हौसलों के साये खिल जाते हैं।

हमने भी सीखा है अब
इन ज़ख़्मों को सलीके से छुपाना…
दिल के भीतर जलती लौ को
मुस्कानों से जगमगाना।

जो मिला नहीं फिर भी अपना लगे,
वो इश्क़ भी क्या अजीब कहानी—
बस ख़्यालों की महफ़िल में ही सही,
दिल की राहों में बसता है वो रूहानी।

#शांडिल्य