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Thursday, October 20, 2016

उभरेंगे एक बार अभी दिल के वलवले,
गो दब गए हैं बारे-गमे-जिन्दगी से हम।
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साहिर' लुधियानवी

1.
वलवला - उम्मीद

Friday, September 9, 2016

बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदों,
बहुत दुःख सह लिए मैं ने,बहुत दिन जी लिया मैं ने.

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साहिर लुधियानवी