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Wednesday, June 22, 2016
तुम्हारा हुस्न आराइश
,
तुम्हारी सादगी जेवर
,
तुम्हें कोई जरूरत ही नहीं बनने-संवरने की।
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असर
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लखनवी
आराइश - शृंगार
,
सजावट
,
आभूषण
Tuesday, March 1, 2016
दिल को बर्बाद किये जाती है गम बदस्तूर किये जाती है
,
मर चुकीं सारी उम्मीदें
,
आरजू है कि जिये जाती है।
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असर
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लखनवी
Sunday, February 21, 2016
जब तक़ाज़ा नींद का हो और तन्हाई न हो
,
उफ़ वो कैफ़ियत कि हो भी और तन्हाई न हो
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असर लखनवी
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