कामरान यूँ था मेरा बख्त-ए-जवाँ कल रात को, झुक रहा था मेरे दर पे आसमाँ कल रात को |
- जगन्नाथ अज़ाद
कामरान = सफल , बख्त = भाग्य
Tuesday, March 1, 2016
सुकूने -दिल जहाने – बेशोकम में ढूढ़ने वाले, यहां हर चीज मिलती है सुकूने-दिल नहीं मिलता।
-जगन्नाथ आजाद
Wednesday, February 24, 2016
हमने दिखा दिखा तेरी तस्वीर जा-ब-जा, हर इक को अपनी जान का दुश्मन बना लिया.
- जगन्नाथ आज़ाद
Friday, February 19, 2016
मन्ज़िल-ए-जानाँ को जब ये दिल रवाँ था दोस्तों, तुम को मैं कैसे बताऊँ क्या समाँ था दोस्तों. -जगन्नाथ आज़ाद
Thursday, February 18, 2016
यह अज्म है जो ले आता है
कदमों तक खींच के मंजिल को, इस राज को रहबर क्या समझे, इस भेद को मंजिल क्या जाने।
-जगन्नाथ 'आजाद'
1.अज्म - दृढ़ संकल्प या इरादा 2. रहबर - पथप्रदर्शक, रास्ता दिखाने वाला