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Thursday, February 25, 2016

कह रहा था शारे - दरिया से, समन्दर का सकूत,
जिसमें जितना जर्फ है, उतना ही वह खामोश है।
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नातिक लखनवी

Thursday, February 18, 2016

सफर में सईए-कामिल हो तो निकले राह मंजिल की,
कि दरिया की रवानी से, बिना पड़ती है साहिल की।
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नातिक लखनवी
1.
सईए-कामिल - मुकम्मल प्रयास, पूरी कोशिश, पराक्रम
2.
रवानी - प्रवाह, बहाव, धार 3. साहिल - किनारा, तट