कह रहा था शारे - दरिया
से, समन्दर का सकूत, जिसमें जितना जर्फ है, उतना ही वह खामोश है।
-नातिक लखनवी
Thursday, February 18, 2016
सफर में सईए-कामिल हो तो
निकले राह मंजिल की, कि दरिया की रवानी से, बिना पड़ती है साहिल की।
-नातिक लखनवी
1.सईए-कामिल - मुकम्मल प्रयास, पूरी कोशिश, पराक्रम
2. रवानी - प्रवाह, बहाव, धार 3. साहिल - किनारा, तट