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Thursday, September 22, 2016

किस-किस पै जान दीजिए, किस-किस को चाहिए ,
गुम हो गया हूँ, बज्मे - तमन्ना में आके मैं।
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जिगर मुरादाबादी

Friday, September 9, 2016

किस-किस पै जान दीजिए, किस-किस को चाहिए ,
गुम हो गया हूँ, बज्मे - तमन्ना में आके मैं।
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जिगर मुरादाबादी

Saturday, June 25, 2016

बहुत हसीन सही सोहबतें फूलों की मगर
वो ज़िन्दगी है जो काँटों के दरमियां गुजरे
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जिगर मुरादाबादी

Wednesday, June 22, 2016

क्या हुस्न ने समझा है, क्या हुस्न ने जाना है,
हम खाकनशीनों के ठोकर में जमाना है।
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जिगर मुरादाबादी
गुलशन-परस्त हूं मुझे गुल ही नहीं अज़ीज़,
कांटों से भी निबाह किए जा रहा हूं मैं ।
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जिगर मुरादाबादी

Tuesday, March 1, 2016

कहाँ दूर हट के जायें, हम दिल की सरजमीं से,
दोनों जहां की सैरें, हासिल है सब यहीं से।
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जिगर मुरादाबादी

Thursday, February 25, 2016

कम न थी ये आलमे –हस्ती किसी सूरत मगर,
वुसअतें दिल की बढ़ीं इतनी कि ज़िन्दां हो गयीं।
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जिगर मुरादाबादी

इन्ही में खींचकर रूहे-मुहब्बत मैने भरे हैं,
मेरा अश्यार देखेंगे मेरा दिल देखने वाले।
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जिगर मुरादाबादी

Wednesday, February 24, 2016

आदमी आदमी से मिलता है,
दिल मगर कम किसी से मिलता है.
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जिगर मुरादाबादी

Sunday, February 21, 2016

अश्कों के तबस्सुम में आहों के तरन्नुम में,
मासूम मोहब्बत का मासूम फ़साना है |
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जिगर मुरादाबादी

सब जिसको असीरी कहते हैं वह है तो असीरी ही लेकिन,
वह कौन-सी आजादी है यहाँ, जो आप खुद अपना दाम नहीं।
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जिगर मुरादाबादी