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Sunday, July 10, 2016

तुम्हीं तो हो जिसे कहती है नाख़ुदा दुनिया,
बचा सको तो बचा लो कि डूबता हूँ मैं |

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मजाज़

Sunday, February 21, 2016

रेंगती, मुड़ती, मचलती, तिल-मिलाती, हाँपती.
अपने दिल की आतिश-ए-पिन्हाँ को भड़काती हुई.
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मजाज़ लखनवी