Saturday, March 28, 2026

"ए सुनो.....
तुम्हारी मुस्कान—
एक दैवीय संगीत बनकर
मेरे शब्दों की तहों में उतरती है।

तुम्हारी हर बात,
जैसे अदृश्य मृगमरीचिका,
मन के गहरे कुंड में सिहरन जगाती है।

और मैं........
असमंजस और सम्मोहित,
सिर्फ तुम्हारे होने का अनुग्रह गिनता हूँ।

शब्द यहाँ विफल हैं—
पर तुम्हारे नयनों की गूँज,
मेरे चेतन में अनन्त काव्य बनकर
धड़कती रहती है। 

#शांडिल्य

Monday, March 23, 2026

इन हथेलियों की लकीरों में
सिर्फ आटा नहीं,
रिश्तों की गहराई गूँथी जाती है।
लकड़ी की हर चोट, जैसे कोई प्राचीन मंत्र,
धरती के सीने से उठता—
मेहनत का संगीत, और उत्सव का स्वर।
यह चक्की नहीं,
समय का चक्र है"
जहाँ परंपराएँ पिसती हैं,
और प्रेम अनन्त रोटी बनकर
पीढ़ियों को तृप्त करता है.♥️

#शांडिल्य

Friday, March 20, 2026

सुनो—
जब तुम गुस्सा होती हो,
तो लगता है जैसे
रात का चाँद अपनी रोशनी भूल गया हो,
नदियाँ अपने किनारे छोड़ गई हों
और ऋतुएँ अपनी पहचान खो बैठी हों।

तुम्हारे गुस्से से
मेरी ज़िंदगी की सारी कड़ियाँ
एकदम बिखर जाती हैं
मत करो यूँ मुझसे रूठने की सज़ा,
ये दिल तुम्हारी मुस्कान का बंदी है।

#शांडिल्य

Tuesday, March 17, 2026

इस शाम की हवा में हल्की-सी ठंडक है,
कपों से उठती भाप में कहानियाँ तैर रही हैं,
और सामने ये तख़्ती—
~[ मैं तुम और चाय ]~ 
मानो रिश्तों का सबसे सच्चा फ़लसफ़ा कह रही हो।

कितनी अजीब बात है ना...
ज़िन्दगी के बड़े-बड़े सपनों को छोड़कर
बस एक कप चाय और तुम्हारी मौजूदगी...
कितनी क़ीमती लगती है।

शामें इसलिए 'ख़ूबसूरत' नहीं होतीं
कि सूरज ढल रहा है...
बल्कि "!  इसलिए कि ~
किसी के साथ चाय का वक़्त
दिल के अंदर तक गर्माहट पहुँचा देता है।

"तुम, मैं और ये चाय—
किसी भी किताब का सबसे प्यारा इश्क़ लगता है।

#शांडिल्य

Friday, March 13, 2026

ओये सुनो ...
यह 'अनंत ब्रह्मांड' का आलिंगन भी
तुमसे मिलन की आस में तपता है—

दिन की उजली करनें,
दोपहर की धधकती प्रार्थनाएँ, 
रात की समाधि-सी ख़ामोशी तक 
तेरा नाम मंत्रवत जपती हैं।

मेरे द्वार की चौखट पर
हल्दी-कुमकुम से अंकित स्वस्तिक
अब भी अधूरी है—

तुम्हारी हथेलियों की आभा
और उस दिव्य लम्स के बिना...
और वो आँगन...

तुलसी की मंजरियाँ रोज़ प्रश्न करती हैं—
कब बरसेगा तेरे चरण-स्पर्श का अमृत,
जिससे यह मृतप्राय मिट्टी 
फिर से प्राण-शक्ति से उद्भासित हो सके...।  

#शांडिल्य

Tuesday, March 10, 2026

ओए सुनो ~
तुम्हारे साथ हर क्षण, एक दिव्य अनुभूति है…
जैसे समय अपने पंख समेट ले, 
और अंतरिक्ष भी केवल एक फुर्तीली झिलमिलाहट बने।
तुम्हारे आलिंगन में सारी सीमाएँ, सारे बंधन, 
रूह की गहराइयों में विलीन हो जाते हैं।
सिर्फ तुम और मैं,और वो अनन्त शांति
जो आत्मा के कोष में सदा प्रतिध्वनित होती है।
हर श्वास में तुम्हारा प्रतिबिंब, 
हर धड़कन में तुम्हारा सुकून।
तुम केवल कोई अस्तित्व नहीं, 
तुम मेरी रूह का परम अनुभव हो। 

#शांडिल्य

Friday, March 6, 2026

"ए सुनो...
मेरी आत्मा तुम्हारी आत्मा से बंधी है,
हर सांस में तुम्हारी मौजूदगी है।
एक पूरी ज़िंदगी तुम्हारे साथ जीनी है—
सिर्फ तुम्हारा बन कर,
हर पल, हर क्षण, हर दिन, हर जीवन…
तुम्हारा होना मेरी प्रार्थना है,
तुम्हारा होना मेरी साधना।
मेरी दुनिया तुम्हारे भीतर बसी है,
मेरी आत्मा हमेशा तुम्हारे साथ" 

#शांडिल्य