Tuesday, October 27, 2026

दिल की ख़ामोशी में उतरता है संगीत, 
रूह को छूकर सँवरता है संगीत।

दर्द जब लफ़्ज़ों में ढल नहीं पाता, 
आँख से आँसू बन बिखरता है संगीत।

कभी यादों की महक, कभी प्रेम की धुन, 
हर एहसास में निखरता है संगीत।

ज़िंदगी जब भी लगे एक अधूरी ग़ज़ल, 
उसमें इक मिसरा-सा भरता है संगीत।

#शांडिल्य

Saturday, October 24, 2026

चिट्ठियों में आज भी एहसास रहते हैं, 
सूखे हुए गुलाबों में कुछ ख़्वाब रहते हैं। 
लफ़्ज़ों में ढूँढ़ लेना कभी धड़कनों की आहट, 
ख़ामोश पन्नों में भी जवाब रहते हैं।

#शांडिल्य

Wednesday, October 21, 2026

एतबार

किस पर करें अब दिल से एतबार, 
हर चेहरा लगता है पहरेदार।

कुछ ज़ख़्म मिले अपनों से ऐसे, 
दिल ढूँढ़ता रहा फिर भी प्यार।

लब ख़ामोश थे, आँखें नम थीं, 
करता रहा दिल तेरा इंतज़ार।

टूटे हुए ख़्वाबों ने सिखाया, 
हर शख़्स नहीं होता वफ़ादार।

— शांडिल्य

Saturday, October 17, 2026

गुज़ारिश

मेरी ख़ामोशी को भी आवाज़ दीजिए, 
कभी तो दिल से हमें याद कीजिए।

हर बार लफ़्ज़ों में कहें, ये ज़रूरी नहीं, 
नज़रों से भी कभी गुज़ारिश कीजिए।

कुछ दर्द छुपे हैं मुस्कुराहट के पीछे, 
कभी बैठकर उनका भी ज़िक्र कीजिए।

बस इतनी-सी है शांडिल्य की गुज़ारिश, 
रिश्ता निभाइए, न वादा कोई कीजिए। 

#शांडिल्य

Wednesday, October 14, 2026

गजरे की खुशबू

गजरे की खुश्बू में, तेरा एहसास मिला, 
जैसे सूखे गुलों को फिर से मधुमास मिला।

तेरे बालों में सजे फूलों की वो महक, 
मेरे ख़ामोश दिल को जीने का अंदाज़ मिला।

कुछ यादें महकती हैं साँसों के साथ, 
गजरे की खुश्बू में जैसे तेरा साथ मिला।

#शांडिल्य

Monday, October 12, 2026

छुप छुप के चांद देखता हूं

छुप-छुप के चाँद देखता था, 
तेरी यादों में रातें काटता था।

चाँद से करता था बातें तेरी, 
हर सितारे में तुझे तलाशता था।

तू मिलेगी कभी ख़्वाबों में शायद, 
इसी उम्मीद में दिल धड़कता था। ✍️

#शांडिल्य

Sunday, October 11, 2026

बारिश की बूंदे

ज़मीं की प्यास को छूकर नई पहचान देती हैं,
हवा के संग मिलकर हर कली को जान देती हैं।

​उतरती हैं जब छत पे तो कोई साज़ बजता है,
पुरानी याद को फिर इक नया उनवान देती हैं।

​हथेली पर ठहर कर जो कभी चुपचाप हँसती हैं,
वो बूँदें ख़्वाब की मानिंद इक मुस्कान देती हैं।

#शांडिल्य