हवा में जैसे कोई संदल घुला हुआ है,
तुम्हारे आने से हर एक पल महका हुआ है।
दिलों के दरमियाँ अब कोई भी रंजिश नहीं,
मोहब्बत का नया इक सिलसिला महका हुआ है।
गुलों ने चुपके से कान में कही है कोई बात,
चमन का हर कोना, हर रास्ता महका हुआ है।
तेरी यादों की बारिश जब से बरसने लगी,
तपिश की धूप में भी रास्ता महका हुआ है।
नज़र मिली तो लगा ख़्वाब सब मुकम्मल हैं,
हयात का ये ख़ूबसूरत मंज़र महका हुआ है।
#शांडिल्य