Wednesday, November 4, 2026

નજાકત

તારી આંખોમાં છલકાતી નજાકત જોઈ છે, 
ફૂલની પાંખડીમાં વસતી કોમળતા જોઈ છે.

તારા શબ્દોમાં જાણે મધુર સંગીત છે, 
તારી ખામોશીમાં પણ એક શાયરી જોઈ છે.

પવન પણ સ્પર્શતાં પહેલાં પરવાનગી માગે, 
તારી અદામાં એવી અનોખી નજાકત જોઈ છે.

ચાંદ શરમાય તારા ચહેરાની ચાંદની સામે, 
તારી સાદગીમાં જ આખી સુંદરતા જોઈ છે.

#शांडिल्य

Monday, November 2, 2026

लगाव

कुछ ऐसा है तुमसे दिल का लगाव, 
जैसे चाँद से हो रातों का जुड़ाव।

न कहने की ज़रूरत, न कोई सवाल, 
ख़ामोशियों में भी रहता है भाव।

दूर रहकर भी करीब लगते हो तुम, 
ये कैसा रिश्ता, ये कैसा प्रभाव।

वक़्त बदलता रहा, मौसम भी बदले, 
मगर कम न हुआ दिल का लगाव।

कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं, 
बस महसूस होता है उनका ठहराव।

#शांडिल्य 

Thursday, October 29, 2026

नज़र में तुम, ख़यालों में तुम, 
मेरे हर एक सवालों में तुम।

चाँद में देखूँ तो चेहरा तुम्हारा, 
फूल की हर अदा में हो तुम।

लाख चाहूँ कि भूल जाऊँ तुम्हें, 
मेरी हर भूल में भी हो तुम।

#शांडिल्य

Tuesday, October 27, 2026

दिल की ख़ामोशी में उतरता है संगीत, 
रूह को छूकर सँवरता है संगीत।

दर्द जब लफ़्ज़ों में ढल नहीं पाता, 
आँख से आँसू बन बिखरता है संगीत।

कभी यादों की महक, कभी प्रेम की धुन, 
हर एहसास में निखरता है संगीत।

ज़िंदगी जब भी लगे एक अधूरी ग़ज़ल, 
उसमें इक मिसरा-सा भरता है संगीत।

#शांडिल्य

Saturday, October 24, 2026

चिट्ठियों में आज भी एहसास रहते हैं, 
सूखे हुए गुलाबों में कुछ ख़्वाब रहते हैं। 
लफ़्ज़ों में ढूँढ़ लेना कभी धड़कनों की आहट, 
ख़ामोश पन्नों में भी जवाब रहते हैं।

#शांडिल्य

Wednesday, October 21, 2026

एतबार

किस पर करें अब दिल से एतबार, 
हर चेहरा लगता है पहरेदार।

कुछ ज़ख़्म मिले अपनों से ऐसे, 
दिल ढूँढ़ता रहा फिर भी प्यार।

लब ख़ामोश थे, आँखें नम थीं, 
करता रहा दिल तेरा इंतज़ार।

टूटे हुए ख़्वाबों ने सिखाया, 
हर शख़्स नहीं होता वफ़ादार।

— शांडिल्य

Saturday, October 17, 2026

गुज़ारिश

मेरी ख़ामोशी को भी आवाज़ दीजिए, 
कभी तो दिल से हमें याद कीजिए।

हर बार लफ़्ज़ों में कहें, ये ज़रूरी नहीं, 
नज़रों से भी कभी गुज़ारिश कीजिए।

कुछ दर्द छुपे हैं मुस्कुराहट के पीछे, 
कभी बैठकर उनका भी ज़िक्र कीजिए।

बस इतनी-सी है शांडिल्य की गुज़ारिश, 
रिश्ता निभाइए, न वादा कोई कीजिए। 

#शांडिल्य