मिलाप
तेरे मिलाप से दिल को अजब करार मिला,
बिछड़ के भी जो न मिला, वो आज प्यार मिला।
बहुत दिनों से थी आँखों में एक प्यास-सी,
तेरी नज़र जो मिली, दिल को इंतज़ार मिला।
न लफ़्ज़ निकले, न कोई सवाल ही आया,
ख़ामोशियों में मगर दिल को इकरार मिला।
तमाम उम्र जिसे ढूँढ़ता रहा था मैं,
वो एक पल में मुझे मेरा ही संसार मिला।
— शांडिल्य