कुछ ऐसा है तुमसे दिल का लगाव,
जैसे चाँद से हो रातों का जुड़ाव।
न कहने की ज़रूरत, न कोई सवाल,
ख़ामोशियों में भी रहता है भाव।
दूर रहकर भी करीब लगते हो तुम,
ये कैसा रिश्ता, ये कैसा प्रभाव।
वक़्त बदलता रहा, मौसम भी बदले,
मगर कम न हुआ दिल का लगाव।
कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं,
बस महसूस होता है उनका ठहराव।
#शांडिल्य