Sunday, October 11, 2026

बारिश की बूंदे

ज़मीं की प्यास को छूकर नई पहचान देती हैं,
हवा के संग मिलकर हर कली को जान देती हैं।

​उतरती हैं जब छत पे तो कोई साज़ बजता है,
पुरानी याद को फिर इक नया उनवान देती हैं।

​हथेली पर ठहर कर जो कभी चुपचाप हँसती हैं,
वो बूँदें ख़्वाब की मानिंद इक मुस्कान देती हैं।

#शांडिल्य

Saturday, October 10, 2026

घरौंदा

रेत पर ख़्वाबों का घरौंदा बना रखा है, 
दिल ने टूटकर भी रिश्ता बना रखा है।

वक़्त की आँधियाँ सब कुछ उड़ा ले गईं, 
हमने यादों में एक कोना बचा रखा है।

छत नहीं, दीवार नहीं, फिर भी देखो, 
तेरी उम्मीद को सहारा बना रखा है।

टूट जाता है हर इक ख़्वाब यहाँ, 
फिर भी आँखों में घरौंदा बना रखा है।

#शांडिल्य

Thursday, October 8, 2026

वो ठहरा सा लम्हा

वो ठहरा सा लम्हा, अभी याद है,
तेरी आँखों में जैसे कोई बात है।

हवा चुप थी, ख़ामोश था आसमाँ,
मगर दिल में उठती हुई बरसात है।

न तुम कुछ कहे, न हम कुछ कह सके,
मगर खामोशी में बड़ी मुलाक़ात है।

वक़्त गुज़र गया, मगर यूँ लगा,
वो लम्हा अभी भी मेरे साथ है।

#शांडिल्य

Wednesday, October 7, 2026

महेक

हवा में जैसे कोई संदल घुला हुआ है,
तुम्हारे आने से हर एक पल महका हुआ है।

​दिलों के दरमियाँ अब कोई भी रंजिश नहीं,
मोहब्बत का नया इक सिलसिला महका हुआ है।

​गुलों ने चुपके से कान में कही है कोई बात,
चमन का हर कोना, हर रास्ता महका हुआ है।

​तेरी यादों की बारिश जब से बरसने लगी,
तपिश की धूप में भी रास्ता महका हुआ है।

​नज़र मिली तो लगा ख़्वाब सब मुकम्मल हैं,
हयात का ये ख़ूबसूरत मंज़र महका हुआ है।

#शांडिल्य

Tuesday, October 6, 2026

आवारा पत्ते

हवाओं के हाथों में हारे पत्ते हैं,
किसी शाख़ से टूटे, बेचारे पत्ते हैं।

कभी धूप ने छाँव छीनी, कभी रात ने,
बहुत दर्द दिल में सँवारे पत्ते हैं।

जिन्हें घर समझकर ठहरना था शायद,
वही उम्र भर के किनारे पत्ते हैं।

कोई पूछता है कहाँ जा रहे हो,
कहें क्या—कि ख़ुद से भी हारे पत्ते हैं।

हमें भी तो दुनिया ने यूँ ही बिखेरा,
कि अब ख़ुद हमें ही न प्यारे पत्ते हैं।

‘शांडिल्य’ पूछता है, कहाँ घर हमारा,
हवाओं ने जब से पुकारे पत्ते हैं।

Sunday, October 4, 2026

खुश्बू

तुम्हारी स्मृतियों की ख़ुशबू से महकता है मन,
जैसे सावन में कोई वन महकता है मन।

फूल झर जाएँ, ऋतुएँ भी बदल जाएँ अगर,
तुम्हारे होने से फिर भी महकता है मन।

तुम्हारी आहट की नरम धूप उतरती है जब,
सूना-सा कोई आँगन भी चहकता है मन।

दूरियों ने तो बहुत कुछ है छुपाया हमसे,
तुम्हारी ख़ुशबू से मगर तुमको परखता है मन।

#शांडिल्य

Sunday, September 6, 2026

मिलाप

मिलाप

तेरे मिलाप से दिल को अजब करार मिला,
बिछड़ के भी जो न मिला, वो आज प्यार मिला।

बहुत दिनों से थी आँखों में एक प्यास-सी,
तेरी नज़र जो मिली, दिल को इंतज़ार मिला।

न लफ़्ज़ निकले, न कोई सवाल ही आया,
ख़ामोशियों में मगर दिल को इकरार मिला।

तमाम उम्र जिसे ढूँढ़ता रहा था मैं,
वो एक पल में मुझे मेरा ही संसार मिला।

— शांडिल्य