वो पहली-सी अब दिल में चाहत नहीं रही,
तेरे बिना भी जीने की आदत नहीं रही।
जो बात तेरी आँखों में पढ़ लेते थे कभी,
अब आँखों में वो पहले-सी शरारत नहीं रही।
हमने भी छोड़ दी है तेरा इंतज़ार अब,
दिल में किसी के लौटने की हसरत नहीं रही।
कल तक जो ज़िंदगी थी तेरे नाम से मेरी,
अब उस कहानी में कोई आहट नहीं रही।
#शांडिल्य