Tuesday, October 6, 2026

आवारा पत्ते

हवाओं के हाथों में हारे पत्ते हैं,
किसी शाख़ से टूटे, बेचारे पत्ते हैं।

कभी धूप ने छाँव छीनी, कभी रात ने,
बहुत दर्द दिल में सँवारे पत्ते हैं।

जिन्हें घर समझकर ठहरना था शायद,
वही उम्र भर के किनारे पत्ते हैं।

कोई पूछता है कहाँ जा रहे हो,
कहें क्या—कि ख़ुद से भी हारे पत्ते हैं।

हमें भी तो दुनिया ने यूँ ही बिखेरा,
कि अब ख़ुद हमें ही न प्यारे पत्ते हैं।

‘शांडिल्य’ पूछता है, कहाँ घर हमारा,
हवाओं ने जब से पुकारे पत्ते हैं।

Sunday, October 4, 2026

खुश्बू

तुम्हारी स्मृतियों की ख़ुशबू से महकता है मन,
जैसे सावन में कोई वन महकता है मन।

फूल झर जाएँ, ऋतुएँ भी बदल जाएँ अगर,
तुम्हारे होने से फिर भी महकता है मन।

तुम्हारी आहट की नरम धूप उतरती है जब,
सूना-सा कोई आँगन भी चहकता है मन।

दूरियों ने तो बहुत कुछ है छुपाया हमसे,
तुम्हारी ख़ुशबू से मगर तुमको परखता है मन।

#शांडिल्य

Sunday, September 6, 2026

मिलाप

मिलाप

तेरे मिलाप से दिल को अजब करार मिला,
बिछड़ के भी जो न मिला, वो आज प्यार मिला।

बहुत दिनों से थी आँखों में एक प्यास-सी,
तेरी नज़र जो मिली, दिल को इंतज़ार मिला।

न लफ़्ज़ निकले, न कोई सवाल ही आया,
ख़ामोशियों में मगर दिल को इकरार मिला।

तमाम उम्र जिसे ढूँढ़ता रहा था मैं,
वो एक पल में मुझे मेरा ही संसार मिला।

— शांडिल्य

Thursday, September 3, 2026

वक्त

हर बात का हिसाब लिए जा रहा है वक्त,
ख़ामोश है मगर ये जिए जा रहा है वक्त।

ठहरा नहीं कभी किसी रहगीर के लिए,
आँखों के सामने से बहे जा रहा है वक्त।

ज़ख़्मों पे इक मुसाफ़िर की मानिंद चुपके से,
मरहम भी ख़ुद ही अपने धरे जा रहा है वक्त।

पहचानता नहीं है अमीरी-ग़रीबी को,
सबके नसीब तय ही किए जा रहा है वक्त।

कल क्या था, आज क्या है, ख़बर तक नहीं मिली,
किस मोड़ पर हमें ये लिए जा रहा है वक्त।

#शांडिल्य

Tuesday, September 1, 2026

कशिश है कयामत है शामत है तिरी शर्मीली आँखो मे
की मचल जाती है जान-ए-तलब तिरी नीली आँखो मे

बहकने को बहुत है बहाने जाँ-ए-जिगर तिरी साँसो मे
मगर ठहर जाता हूँ सुबहो शाम तिरी नशीली आँखो मे

डूब जाने की परवाह  किसे है जानिब सफर है इश्क मे
मगर हम तो तैरते रहते है शीशे सी चमकीली आँखो मे

#शांडिल्य

Monday, August 31, 2026

ओढ़नी जब लहराती है हवा के संग,
लगता है जैसे मौसम गुनगुनाता है।

कभी रंगों में सिमटती है कोई चाहत,
कभी चेहरे पर आकर शर्माती है।

उसकी हर सिलवट में छुपी है कहानी,
जो बिना कहे भी दिल को समझाती है।

ओढ़नी सिर्फ़ कपड़ा नहीं होती,
किसी की यादों की खुशबू बन जाती है।

#शांडिल्य

Saturday, August 29, 2026

दिल ने जब भी तुझे चुपके से पुकारा है,
तेरी यादों ने मुझे आकर सँवारा है।

दूर होकर भी तू दिल से कहाँ दूर हुआ,
तेरा एहसास ही जीने का सहारा है।

रात तन्हा हो तो आवाज़ तेरी आती है,
जैसे खामोश फ़िज़ाओं ने पुकारा है।

जिसे दुनिया ने समझा था मेरा ख़्वाब कभी,
वही ख़्वाब आज भी दिल को प्यारा है।

#शांडिल्य