ज़मीं की प्यास को छूकर नई पहचान देती हैं,
हवा के संग मिलकर हर कली को जान देती हैं।
उतरती हैं जब छत पे तो कोई साज़ बजता है,
पुरानी याद को फिर इक नया उनवान देती हैं।
हथेली पर ठहर कर जो कभी चुपचाप हँसती हैं,
वो बूँदें ख़्वाब की मानिंद इक मुस्कान देती हैं।
#शांडिल्य