Sunday, April 12, 2026

—ए सुनो....🫀
"तुम्हारा पहला स्पर्श..
~जैसे अनंत नीरवता में पहली नाद की तरंग।
उस क्षण मेरे भीतर का हर शून्य भर गया—
ना शरीर ने जाना, ना इंद्रियों ने,
पर आत्मा ने एक अनाम बंधन में खुद को बाँध लिया।

क्योंकि"~
 प्रेम स्पर्श का विषय नहीं है,
वह चेतना की गोद में पलने वाला नाद है।
देह की सीमाएं "जहाँ समाप्त होती हैं,
वहाँ यह बंधन अपनी अनंत जड़ें जमाता है।

और तब समझ आया—
तू मुझसे अलग नहीं,
तू मेरी हर श्वास का अप्रकट स्वर है,
जिसे न वियोग तोड़ सकता है, न मृत्यु।
क्योंकि यह प्रेम देह का नहीं, अमृत चेतना का संधान है।

#शांडिल्य

Wednesday, April 8, 2026

प्रेम में पुरुष...........'
स्त्री की छाती से चिपककर शिशु बन जाता है।

~और स्त्री.....'''
माँ की सतर्कता लिए हर विषम को 
अपने हृदय में अवशोषित करती है,
ताकि उसका पुरुष निर्भीक और सुरक्षित रहे। 
❤️🫀🤌

#शांडिल्य

Tuesday, April 7, 2026

-- ओये सुनो !!!!!!

प्रेम केवल हृदय की धड़कन नहीं,
यह चेतना की अदृश्य रसायन-क्रिया है,
जहाँ...."" तुम्हारे....'
झुमकों की झंकार मेरी स्मृतियों में प्रतिध्वनित होती है,
हर झूलन में कोई अधूरी कविता,
हर कंपन में कोई अनलिखा इतिहास..." 🧡❤️

#शांडिल्य

Sunday, April 5, 2026

"आज की तरह....."
मैं कल भी हमेशा तुम्हारा फ़ोटोग्राफ़र रहूँगा।
तुम्हारी हर मुस्कान, हर नज़र, हर ख्वाब,
मेरे भीतर की हर भावना में संजोकर रखूँगा।
हर जन्म, हर सृष्टि में, सिर्फ़ तुम्हारा साथ पाना~
मेरे मन का यह गहरा, अटूट वचन है" ♥️💛"

#शांडिल्य

Saturday, April 4, 2026

प्रेयसी कहती है—
मुझे सीता की तरह चाहो,
= "मैंने कहा—
तुम्हें राम की तरह खो भी सकता हूँ?
वो चुप रही..."
~क्योंकि ""
आधुनिक प्रेम में वियोग का साहस नहीं होता!"

❤️🧡

#शांडिल्य

Tuesday, March 31, 2026

जीवन का "अवसाद" कभी भी स्थायी नहीं,
हर 'संघर्ष' में छिपा होता है 'अमूल्य' त्राण।
जो धैर्य से कष्टसाध्य पथ पर चल पड़ता है,
वही अप्रमेय विजय का स्वाद चखता है।

असफलता केवल एक क्षणिक परावर्तन है,
नहीं तो हर क्षण में संपूर्णता के बीज अंकुरित होते हैं।
आज का अस्थिरतम क्षण कल का 
अतुलनीय गौरव बन जाता है।

तो चलो,
अविचलित इच्छाशक्ति  के साथ उठो,
और उस अज्ञात शिखर को छू लो,
जहाँ केवल वही पहुँचते हैं,
जो अपने संकल्प  को अद्वितीय 
अग्नि में परिवर्तित कर देते हैं।

#शांडिल्य

Monday, March 30, 2026

छोटे कदमों की मासूमियत
बड़े कदमों की छाया में....
"हर रात की सैर भी
एक अनकही दास्तान बन जाती है।

प्यारी जैकेट में
वह नन्हींआत्मा " और
उसके साथ चल रहा..." वह कोई—
जैसे जीवन की सुरक्षा और प्रेम
हमेशा साथ-साथ चलते हों , 
शायद यही है जीवन का सच्चा गीत। 
💛🌼♥️

#शांडिल्य