"जो अग्नि जीवन को रोशन करती है,
वही एक दिन राख बनकर
सन्नाटे में अपना ``गीत`` गाती है।
जलता हुआ केवल 'शरीर' नहीं,
जलता हुआ इतिहास है"—
जिसमें प्रेम की धधक, हँसी की किरणें" ..............!
और आँसुओं की नर्म बारिश समाई है।
यह धुआँ सिर्फ़ आसमान की ओर नहीं उड़ता,
यह उन यादों को भी साथ ले जाता है,
जो समय की लकीरों पर कभी मिट नहीं सकतीं।
मृत्यु केवल विराम है ,पूर्णविराम नहीं.....।
~"क्योंकि
यहाँ छोड़ा गया प्रेम
अनंत काल तक गूँजता रहता है—
हर धड़कन में, हर हवा में,
हर अधूरी मुस्कान में।
#शांडिल्य