वो ठहरा सा लम्हा, अभी याद है,
तेरी आँखों में जैसे कोई बात है।
हवा चुप थी, ख़ामोश था आसमाँ,
मगर दिल में उठती हुई बरसात है।
न तुम कुछ कहे, न हम कुछ कह सके,
मगर खामोशी में बड़ी मुलाक़ात है।
वक़्त गुज़र गया, मगर यूँ लगा,
वो लम्हा अभी भी मेरे साथ है।
#शांडिल्य