इस शाम की हवा में हल्की-सी ठंडक है,
कपों से उठती भाप में कहानियाँ तैर रही हैं,
और सामने ये तख़्ती—
~[ मैं तुम और चाय ]~
मानो रिश्तों का सबसे सच्चा फ़लसफ़ा कह रही हो।
कितनी अजीब बात है ना...
ज़िन्दगी के बड़े-बड़े सपनों को छोड़कर
बस एक कप चाय और तुम्हारी मौजूदगी...
कितनी क़ीमती लगती है।
शामें इसलिए 'ख़ूबसूरत' नहीं होतीं
कि सूरज ढल रहा है...
बल्कि "! इसलिए कि ~
किसी के साथ चाय का वक़्त
दिल के अंदर तक गर्माहट पहुँचा देता है।
"तुम, मैं और ये चाय—
किसी भी किताब का सबसे प्यारा इश्क़ लगता है।
#शांडिल्य