Wednesday, May 13, 2026

ए सुनो !

तुम्हारा एक आलिंगन
मेरी संज्ञानात्मक पीड़ा को मेरे देहकाय से फोड़कर
क्षितिज के पार अनंत शून्य में विसर्जित कर देता है।

तुम्हारा एक आलिंगन
मेरी कुम्हलाया आत्मा और ऊर्जा को
पुनः उल्लासपूर्ण करता है—
सजीव, दिव्य और अनंत प्राणवान!

और मैं कहूँ तो…
तुम्हारे आलिंगन की छाया
मेरी रूह में बसती है,
जैसे सूरज की पहली किरण
भोर के अँधियारे को चीरती है"! ♥️🌼

#शांडिल्य

Sunday, May 10, 2026

"माँ की आख़िरी 'निशानी'…

मेरे शब्दों में उसकी ममता की परछाईं,
मेरी रगों में उसका साहस,
और मेरी रचनाओं में उसकी दुआओं की गूँज।
मैं एक कवि हूँ—
पर उसके बिना, हर पंक्ति अनाथ-सी लगती है,
जैसे कलम भी उसकी गोद को तलाश रही हो…
.......✍️😥

#शांडिल्य

Monday, May 4, 2026

जब तेरे होंठों पर
वो मधुप्रिया मुस्कान सजी होती है,
तो लगता है जैसे
कायनात का हर रंग 
अपना अस्तित्व खो बैठा हो।

तेरे इस मृदुल हास्य-संगीत पर
प्रकृति भी मानो इतराती है
और शायद!
हंसी की मधुर लहरियों में
फूल भी अपनी सुवास 
जलन में समर्पित कर देते होंगे।

#शांडिल्य

Friday, May 1, 2026


बस दिखावे वाले लोग ही scroll कर देते हैं।
मैं वही लिखता हूँ,
जो कोई जुबाँ से कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।

जो जज़्बात तुम अंदर घुटा देते हो,
मैं उन्हें खुलकर उजागर करता हूँ।

अगर सच में —
अपनी आत्मा को झाँकना चाहते हो…
तो #Follow' करना अब तुम्हारे लिए अनिवार्य है। 🫀

#शांडिल्य

Wednesday, April 29, 2026

एक प्रेमिका के लिए ~
दुनिया की सबसे भरोसेमंद जगह
उसके यार का कंधा होता है…

"कंधा —
सिर्फ हड्डी और मांस का टुकड़ा नहीं,
ये वो ठोस सहारा है जहाँ मोहब्बत 
और भरोसा जम के बैठा होता है।

जब सिर उस पर टिकता है,
तो सिर्फ शरीर नहीं ठहरता....
दिल और आत्मा की सुकून भरी 
जगह भी वहीं मिलती है।

"सोचो—
समाज और दिल की नज़र से देखें,
सच्चा बंधन और अडिग वफादारी
वो ढांचा है जो ज़िन्दगी के उफान भरे समय में
दिल और दिमाग को संभाले रखता है।

इसलिए....."!
कुछ लड़कियों को महल 
या पैसों का झमेला नहीं चाहिए... 
बस वो भरोसा,ठोस सहारा 
और आत्मा की सुरक्षा चाहिए,
जो उन्हें समाज और अपने अंदर 
दोनों में आराम दे।

#शांडिल्य

Monday, April 27, 2026

तू मरीचिका…
मैं मृग, प्यासा और भटका हुआ।
तू अनंत राहों की मंज़िल…
मैं, सिर्फ़ थकी आँखों में तेरा सपना लिए, चलता हुआ।

तू छाया की तरह दूर..
मैं धूप की तरह अकेला।
तू आग की तरह जलती…
मैं राख बनकर तुझ तक पहुँचने की आस में।

#शांडिल्य

Saturday, April 25, 2026

जज़्बातों के पहिए 
अब भी गतिशील होना चाहते हैं,
पर समय की कठोर ग्रंथि ने 
उनकी धुरी को बाँध दिया है।

मन एक रणभूमि है—
जहाँ इच्छा और कर्तव्य,
लालसा और तर्क,
दोनों अपने-अपने अस्त्र उठाए खड़े हैं।

तुम्हें चुनना—
मानो अपनी ही अंतरात्मा को प्रश्नांकित करना,
क्योंकि हर भाव के पीछे.. 
संस्कारों का प्रहरी खड़ा है।

और मैं?
मैं वही कर्ण हूँ—
जिसकी चेतना वचनबद्ध है,
पर हृदय अब भी उस निषिद्ध तृष्णा से ग्रसित है
जिसे पाने का स्वप्न ही एक अपराध लगता है।

#शांडिल्य