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Wednesday, January 18, 2017
क़ासिद है तू ख़ुदा का अगर चिट्ठियाँ ही बाँट
,
उन चिट्ठियों पे तू लिखा अपना पता न देख.
-
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
तू देख रहा है
,
जो मेरा हाल है क़ासिद
,
मुझ को यही कहना है मैं कुछ नहीं कहता.
-
कैफ देहलवी
Monday, January 9, 2017
उम्र जलवों में बसर हो ये जरूरी तो नहीं
हर शब-ए-गम की सहर हो ये जरूरी तो नहीं
-
खामोश देहलवी
बेवफ़ा भी हो सितमगर भी जफा पेशा भी
,
हम ख़ुदा तुम को बना लेंगे तुम आओ तो सही.
-
मुमताज़ मिर्ज़ा
Saturday, December 3, 2016
क्या जाने लिख दिया क्या उसे इज्तेराब में
,
क़ासिद की लाश आई है ख़त के जवाब में.
-
मोमिन
मेरे दिले-मायूस में क्यों कर न हो उम्मीद
,
मुरझाए हुए फूलों में क्या बू नहीं होती।
-'
अख्तर
'
अंसारी
अपने ख्वाबों में तुझे जिसने भी देखा होगा
आंख खुलते ही तुझे ढूंढ़ने निकला होगा
-
अब्बास दाना
आग है
,
पानी है
,
मिट्टी है
,
हवा है मुझ में
और फिर मानना पड़ता है कि खुदा है मुझ में
-
कृष्णबिहारी नूर
अश्कों के निशाँ पर्चा-ए-सादा पे हैं क़ासिद
,
अब कुछ न बयाँ कर ये इबारत ही बहुत है.
-
एहसान अली खान
Thursday, November 3, 2016
रात हम तो पिये थे मगर आपकी आँख भी शराबी थी
,
फिर हमारे खराब होने मेँ आप ही कहिये क्या खराबी थी
|
नरेश कुमार शाद
जाने तब क्यों सूरज की ख़्वाहिश करते हैं लोग
,
जब बारिश में सब दीवारें गिरने लगती हैं
|
-
सलीम कौसर
आप को भूल जाएं हम इतने तो बेवफ़ा नहीं
,
आप से क्या गिला करें आप से कुछ गिला नहीं.
-
तस्लीम फ़ाज़ली
Thursday, October 20, 2016
किस्मत के नाम को तो सब जानते हैं लेकिन
,
किस्मत में क्या लिखा है
ईश्वर
जानता है
|
-
अख्तर शिरानी
Wednesday, October 12, 2016
मुहब्बत में बुरी नियत से कुछ सोचा नहीं जाता
कहा जाता है उसको बेवफा
,
समझा नहीं जाता
वसीम बरेलवी
वफ़ा
' -
ए-बदनसीब को बख्शा है तूने दर्द जो
,
है कोई इस की भी दवा इतना ज़रा बताये जा.
-
रुस्तम सहगल वफ़ा
झूठी ही तसल्ली दो
,
उम्मीद तो बंध जाए
,
धुंधली
–
सी सही लेकिन इक श
माँ
तो जल जाए।
-'
फना
'
कानपुरी
Monday, August 29, 2016
आने वाले किसी तूफ़ान का रोना रोकर
,
नाख़ुदा ने मुझे साहिल पे डुबोना चाहा
|
-
हफीज जलंधरी
साहिल = किनारा
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