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Thursday, May 5, 2016

हमें कोई ग़म नहीं था,ग़म-ए-आशिक़ी से पहले,
न थी दुश्मनी किसी से,तेरी दोस्ती से पहले.
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शकील बदायुनी

ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो, राह-ए-आम तक न पहुंचे,
मुझे खौफ है,ये तोहमत मेरे नाम तक न पहुंचे.
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शकील बदायुनी 

राह-ए -आशिक़ी के मारे राह-ए -आम तक न पहुंचे,
कभी सुबह तक न पहुंचे, कभी शाम तक न पहुंचे.
बर्बाद-ए-आशिकी मे तेरी, हम इस अंजाम तक पहुंचे।
कैसी सुबह-क्या शाम, कदम जब मीना-ओ-जाम तक पहुंचे॥
- शकील बदायुनी 

Tuesday, March 8, 2016

ऐ मोहब्बत तेरे अन्जाम पे रोना आया,
जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया.
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शकील बदायुनी

Tuesday, March 1, 2016

जहाने-रंगो-बू में क्यों तलाशे-हुस्न हो मुझको,
हजारों जलवे रख्शिंदा है मेरे दिल के पर्दे में।
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शकील' बदायुनी

Sunday, February 21, 2016

दूर है मन्ज़िल राहें मुश्किल आलम है तन्हाई का,
आज मुझे एहसास हुआ है अपनी शिकस्तापाई का |
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शकील बदायुनी

मेरा अज्म इतना बुलंद है कि पराये शोलों का डर नहीं,
मुझे खौफ आतिश-ए-गुल से है,ये कहीं चमन को जला न दे |
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शकील बदायुनी

Friday, February 19, 2016

दूर है मन्ज़िल राहें मुश्किल आलम है तन्हाई का,
आज मुझे एहसास हुआ है अपनी शिकस्तापाई का |
-शकील बदायुनी