हमें कोई ग़म नहीं था,ग़म-ए-आशिक़ी से पहले, न थी दुश्मनी किसी से,तेरी दोस्ती से पहले.
- शकील बदायुनी
ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो, राह-ए-आम तक न पहुंचे, मुझे खौफ है,ये तोहमत मेरे नाम तक न पहुंचे.
- शकील बदायुनी
राह-ए -आशिक़ी के मारे
राह-ए -आम तक न पहुंचे, कभी सुबह तक न पहुंचे, कभी शाम तक न पहुंचे. बर्बाद-ए-आशिकी मे तेरी, हम इस अंजाम तक पहुंचे। कैसी सुबह-क्या शाम, कदम जब मीना-ओ-जाम तक पहुंचे॥ - शकील बदायुनी
Tuesday, March 8, 2016
ऐ मोहब्बत तेरे अन्जाम पे रोना आया, जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया.
- शकील बदायुनी
Tuesday, March 1, 2016
जहाने-रंगो-बू में क्यों
तलाशे-हुस्न हो मुझको, हजारों जलवे रख्शिंदा है मेरे दिल के पर्दे में।
-'शकील' बदायुनी
Sunday, February 21, 2016
दूर है मन्ज़िल राहें
मुश्किल आलम है तन्हाई का, आज मुझे एहसास हुआ है अपनी शिकस्तापाई का |
- शकील बदायुनी
मेरा अज्म इतना बुलंद है कि पराये शोलों का डर नहीं, मुझे खौफ आतिश-ए-गुल से है,ये कहीं चमन को जला न दे |
- शकील बदायुनी
Friday, February 19, 2016
दूर है मन्ज़िल राहें मुश्किल आलम है तन्हाई का, आज मुझे एहसास हुआ है अपनी शिकस्तापाई का | -शकील बदायुनी