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Wednesday, February 24, 2016

वक़्त रहता नहीं कहीं छुपकर,
इस की आदत भी आदमी सी है.
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गुलज़ार

Sunday, February 21, 2016

एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी,
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तन्हाई भी |
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गुलज़ार