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Thursday, June 16, 2016

काटी तमाम उम्र फरेब-ए-बहार में
कांटे समेटते रहे फूलों के नाम से
ये और बात है कि 'अली' हम ना सुन सके
आवाज़ उसने दी है हमें हर मुकाम से
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अली अहमद ज़लीली

Friday, February 19, 2016

मुहब्बत में ख़याल-ए-साहिल-ओ-मन्ज़िल है नादानी,
जो इन राहों में लुट जाए वही तक़दीर वाला है.
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अली अहमद जलीली