Tuesday, March 3, 2026

~ए सुनो...
बस इतना सा ख्वाब.....'
रात अपनी अंतिम साँसों में है...
और तुम,मेरे इतने समीप कि
मैं तुम्हारी हर धड़कन को 
अपने हृदय में लिख सकूँ।

"तुम्हारी आँखों में बहती गंगा
मानो मेरे पापों का प्रक्षालन कर रही हो, 
और मैं उस जलधारा के संग
एक अदृश्य गीत गुनगुना रहा हूँ 
गीत, जो केवल आत्माएँ सुनती हैं।

बहुत रात बीत चुकी...
आओ "अब मैं तुम्हें निद्रा के आँगन में उतार दूँ,
जहाँ पवन अपनी तंत्री पर अमृतमयी लोरी छेड़े,
और समय थम जाए हमारे बीच की 
इस मौन उपासना पर..." 

#शांडिल्य