जाने क्यूँ नये-नये से रंग बदल रही है ज़िन्दगी
आजकल ,इसी कशमकश में गुज़र रही है ज़िन्दगी
वक़्त को किसकी है फ़िक्र ? कोई चले या रुके
लम्हा-लम्हा करके घट रही है ज़िन्दगी
संभल खुद-ब-खुद ,कोई नहीं बताएगा
गुमनाम सी राहों पर चल रही है ज़िन्दगी
ख़्वाब है आसमां पे घर बनाना उनका
ज़मीं पर ,टुकड़े-टुकड़े बिखर रही है ज़िन्दगी
जिनके जवाब आज मैं नहीं दे सकता
ऐसे सवाल मुझसे कर रही है ज़िन्दगी
बड़ा भोला है दिल ,दुनिया के दांव पेंच नहीं जानता
बड़ी मुश्किल से गिरकर संभल रही है ज़िन्दगी
हर लूटने वाले को देखते हैं ,बंद दरवाजों के झरोखों से
इंसान कि इसी बेबसी पर ,आँखें मल रही है ज़िन्दगी
घर ,सड़क ,चौराहे ,सरहद कि बात क्या करें ?
यहाँ तो दुनिया में आने से पहले ही मर रही है ज़िन्दगी
आजकल ,इसी कशमकश में गुज़र रही है ज़िन्दगी
वक़्त को किसकी है फ़िक्र ? कोई चले या रुके
लम्हा-लम्हा करके घट रही है ज़िन्दगी
संभल खुद-ब-खुद ,कोई नहीं बताएगा
गुमनाम सी राहों पर चल रही है ज़िन्दगी
ख़्वाब है आसमां पे घर बनाना उनका
ज़मीं पर ,टुकड़े-टुकड़े बिखर रही है ज़िन्दगी
जिनके जवाब आज मैं नहीं दे सकता
ऐसे सवाल मुझसे कर रही है ज़िन्दगी
बड़ा भोला है दिल ,दुनिया के दांव पेंच नहीं जानता
बड़ी मुश्किल से गिरकर संभल रही है ज़िन्दगी
हर लूटने वाले को देखते हैं ,बंद दरवाजों के झरोखों से
इंसान कि इसी बेबसी पर ,आँखें मल रही है ज़िन्दगी
घर ,सड़क ,चौराहे ,सरहद कि बात क्या करें ?
यहाँ तो दुनिया में आने से पहले ही मर रही है ज़िन्दगी

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