Thursday, June 12, 2014

तनहा गुजर रही थी तनहा गुजर रही है
जो आँखों में बस गयी थी वो दिल में उतर रही है
वो चीज़ नहीं है तू  हो जिसको भुलाना आसान
आँखों की रौशनी थी सांसों में खुशबू बनकर बिखर रही है
सब्नम की बूँद हो तुम या हीरा तरसा कोई
चांदनी तेरे बदन से पूनम की बिखर रही है
मुजकों  रिझा लिया था हर अदा ने तेरी
दिल में समाये रहती थी तस्वीर तू भी मेरी
भुला दिया था जिनको कभी का -उनकी याद आ रही है
जो सूखी पड़ी थी सदियों से वो आँखें आंसू बहा रही है

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