दूसरों को हमारी सज़ायें न देचांदनी रात को बद-दुआयें न देफूल से आशिक़ी का हुनर सीख लेतितलियाँ ख़ुद रुकेंगी सदायें न देसब गुनाहों का इक़रार करने लगेंइस क़दर ख़ुबसूरत सज़ायें न देमोतियों को छुपा सीपियों की तरहबेवफ़ाओं को अपनी वफ़ायें न देमैं बिखर जाऊँगा आँसूओं की तरहइस क़दर प्यार से बद-दुआयें न दे
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