Wednesday, July 2, 2014

आदमी की जिन्दगी में थोड़ी सी ख़ुशी है ढेरों सारे गम है 
जीने को जाने क्यूँ ये जिन्दगी फिर भी पड़ जाती कम है !
दिल में सुखा पिछले कई दिन से आँखें आज भी नम है 
धड़कन है रुकी रुकी सी एक मुद्दत से सांसे आज भी बेदम हैं !!

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