Wednesday, July 16, 2014

जीने के लिए उनकी मुस्कान काफी हैं !
कलम से लिखी हुई ये दास्तान काफी हैं !!
तस्वीर की क्या जरुरत हैं....!
उन्हें देखने के लिए तो बंद आँखे ही काफी हैं !!

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