Wednesday, July 16, 2014
हम से पूछो। हम झुल्से हैं सावन की घनघोर घटा में
तुम क्या जानों किस शिद्दत की होती है बरसात कि आँच
दिन में पेड़ों के साए में ठडक मिल जाती है
दिल वालों की रूह को अक्सर झुलसाती है रात कि आँच
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