पल हर पल मै तडपता रहता हूँ उसके लिए,
मरना चाहा भी तो सांसे उसकी सताने लगी
रोम रोम में बसी है उसके जिस्म की खुसबू ,
उसे दिल भर के चूमने की ख्वायिश आने लगी मै क्या बताऊ किस तरह से जी रह हूँ मै,
ऐसा लगता है मौत की आहट मुझे सताने लगी
मै खफा हूँ उससे वो खफा है मुझसे,
फिर ना जाने क्यों ये आखें मुझे रुलाने लगी
मरना चाहा भी तो सांसे उसकी सताने लगी
रोम रोम में बसी है उसके जिस्म की खुसबू ,
उसे दिल भर के चूमने की ख्वायिश आने लगी मै क्या बताऊ किस तरह से जी रह हूँ मै,
ऐसा लगता है मौत की आहट मुझे सताने लगी
मै खफा हूँ उससे वो खफा है मुझसे,
फिर ना जाने क्यों ये आखें मुझे रुलाने लगी

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