Friday, November 14, 2014

मेरी उजडी दुनियाँ को तू आबाद न कर !
बीते लम्हों को तू फिर से याद न कर !!
एक कैद परिंदे का हैं तुमसे यही कहना...!
मैं भूल चूका हूँ उडना मुझे फिर से आज़ाद न कर !!

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