Saturday, November 15, 2014
जागते हैं तनहा रातों में !
खोते हैं दिल उनकी बातों में !!
मिली नहीं दिल की मंजिल आज तक !
क्योकि दर्द ही दर्द लिखा हैं इन हाथों में !!
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