Monday, February 2, 2015
तुम दूर हो कर भी मेरे करीब हो !
मेरे दिल से पूछो कितने अज़ीज़ हो !!
अपनी हथेली को कभी गौर से देखना !
सायद किसी लकीर में मेरा भी नसीब हो
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment