Tuesday, March 3, 2015

जब हर शब्द केवल वेदना दे
हर गीत उदास लगे
तब सिर्फ एक बार पुकारना मेरा नाम

जब तपती दोपहर चुभने लगे
मुस्कान फीकी पड़ने लगे
तब सिर्फ एक बार करना याद

जब चाँद निकले ही ना बादलों से
और रात बहुत गहरी लगे
तब सिर्फ एक बार थामना मेरा हाथ

मैं हर मोड़ पर मिलूँगा तुमसे
मील का पत्थर बनकर
मैं साथ चलूँगा कड़ी धूप में वटवृक्ष की छाया बनकर 

जब मिल जाए मंजिल तुमको
और तुम ना देखना चाहो मुड़कर
मैं परछाई-सी विलीन हो जाऊँगा ...

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