Sunday, May 17, 2015

मेरे दिल की है यही आरजू मुझे तू ही बस मिला करे
यूही चाहे मुझको तामम उम्र, ना शिकायते गिला करे

मेरी चाहतें मेरी ख्वाहिशें मेरी ज़िंदगी है तेरे लिए
मेरी रब से येही दुआ है बस .तुझे कोई न मुझ से जुदा करे

मेरे ख्वाब मेरे ये रत जगे मेरी नींद भी है तेरे लिए
मेरी ज़िंदगी जो बची है अब तेरे नाम इस को खुदा करे

मुझे ज़िंदगी से गिला नही, मुजे तुझ से बस येही आस है
मैं भी चाहूँ तुझ को सदा यूही तू वफ़ा करे या जफा करे

ये वह फासले हैं मेरे सनम जिन्हे कोई भी ना मिटा सका
ये तो फैसले है नसीब के इन्हे कैसे कोई मिटा करे

मेरी ज़िंदगी मे खिजां है बस, ना बाहर कभी आ सकी
येही अश्क मेरा नसीब हैं कोई गुल खुशी का खिला करे|

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