Tuesday, June 9, 2015
दिल की हालत यूँ बयान हुई
कुछ इधर गिरा कुछ उधर गिरा
राह-ए-उल्फत का ये नजराना है जालिम
न वो तुझे मिला न वो मुझे मिला
चाँद खिला पर रौशनी न आई
रात बीती पर दिन न चढ़ा
अर्श से फर्श तक के सफर मे
कमबख्त रौशनी तबाह हो गयी
दिल की हालत यू बयान हुई
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