सफर में सईए-कामिल हो तो
निकले राह मंजिल की,
कि दरिया की रवानी से, बिना पड़ती है साहिल की।
-नातिक लखनवी
1.सईए-कामिल - मुकम्मल प्रयास, पूरी कोशिश, पराक्रम
2. रवानी - प्रवाह, बहाव, धार 3. साहिल - किनारा, तट
कि दरिया की रवानी से, बिना पड़ती है साहिल की।
-नातिक लखनवी
1.सईए-कामिल - मुकम्मल प्रयास, पूरी कोशिश, पराक्रम
2. रवानी - प्रवाह, बहाव, धार 3. साहिल - किनारा, तट
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