अँधेरों में उजाले चाहते हैं पेट भूखे निवाले
चाहते हैं।
प्यास से छटपटाती रूह तन्हा साथ के पीने वाले चाहते हैं।
सर्द रातों के झेलते नश्तर गर्म मोटे दुशाले चाहते हैं।
बहुत भारी हैं दर्द के किस्से हल्के-फुल्के रिसाले चाहते हैं।
झुठ के रंग में रंगी दुनिया सच्चाई की मिसालें चाहते हैं।
बड़ी कमजोर नस्ल आई हैमौत वाले जियाले चाहते हैं।
यह तरक्की पसंद महफिल है दिल की जुबाँ पे ताले चाहते हैं।
प्यास से छटपटाती रूह तन्हा साथ के पीने वाले चाहते हैं।
सर्द रातों के झेलते नश्तर गर्म मोटे दुशाले चाहते हैं।
बहुत भारी हैं दर्द के किस्से हल्के-फुल्के रिसाले चाहते हैं।
झुठ के रंग में रंगी दुनिया सच्चाई की मिसालें चाहते हैं।
बड़ी कमजोर नस्ल आई हैमौत वाले जियाले चाहते हैं।
यह तरक्की पसंद महफिल है दिल की जुबाँ पे ताले चाहते हैं।
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