Wednesday, March 12, 2025

तारों भरी विभावरी, पर दिखता ना चांद
बार बार मुझसे कहे, कुछ अंतर मन नाद

रात बात हो प्रेम की, कहती पवन पुकार
नींद ना आती जागता, किस विरही का प्यार

मधुरस भीनी रात हो, मधुर मीत के संग
छूकर पावन प्रीत से, कुशमित करता अंग

#शांडिल्य

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