Saturday, March 29, 2025

जिस्म मिलता हैं ज़ब रूह से तुम्हारी
दिल में मेरे हल्का हल्का सा सरूर छाने लग़ जाता है

दिल धड़कने लगता है तुमसे से मिल जाने पर
हुस्न पर तुम्हारे प्यारा सा निखार आने लगता है

खोने लगते है ख़्वाबों की दुनियाँ में हम दोनों
सपनों में मिलने का खुमार सा छाने लगता है

जुल्फें संवरने लगती हैँ तुम्हारी प्यार बहकने लगता है
अँखियो में तुम्हारी मोहब्बत का काजल घुलने लग़ता है

#शांडिल्य

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