संभलना था हमें,,
साथ फिसलते चले गए,,
ना चाहा फिर भी,,
उसकी चाहत में संवरते चले गए,,
अंज़ाम मालूम था,,
फिर भी आगे बढ़ते चले गए,,
तिनका तिनका जोड़ा था ख़ुद को,,
दूरियों में बिखरते चले गए,,
अब तकलीफ़ ये नहीं कि दूर हैं,,
पास रह कर भी बिछड़ते चले गए,,
#शांडिल्य
No comments:
Post a Comment