कहां फिर मेरे लफ्जो मे आवाज रहती हैं
तुझे ना सोचू तो तबियत इनकी भी नासाज रहती हैं
इल्तजा है शिकवा है शिकायत जिंदगी से
सिर्फ मेरी है वो तो क्यू मुझसे नाराज रहती हैं
जर्रा जर्रा वाकिफ है यू तो मेरी मोहब्बत से
ना जाने क्यों बेपरवाह मेरी हमराज रहती हैं
#शांडिल्य
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