Friday, September 26, 2025

कहां फिर मेरे लफ्जो मे आवाज रहती हैं
तुझे ना सोचू तो तबियत इनकी भी नासाज रहती हैं

इल्तजा है शिकवा है शिकायत जिंदगी से
सिर्फ मेरी है वो तो क्यू मुझसे नाराज रहती हैं

जर्रा जर्रा वाकिफ है यू तो मेरी मोहब्बत से 
ना जाने क्यों बेपरवाह मेरी हमराज रहती हैं

#शांडिल्य 

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