Sunday, November 2, 2025

न जाने क्या बात है तुम्हारे हर अंदाज में
अजीब सी कशिश है तुम्हारे इस शबाब में

तेरी #सांसों की हरारत से पिघल जाऊं न कहीं 
तुम समा गये हो मेरी हर #धड़कन हर #सांस में 

तेरे दीदार की तलब लाजिमी है ऐ मेरे सनम
तेरी #धड़कन भी हुई शामिल मेरी आवाज में..

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