Saturday, December 13, 2025

टूटे हुए ख़्वाब कहीं चुभ न जाएं आंखों में,
बड़े एहतियात से मसलना इन पलकों को,
बड़े चुगलखोर होते हैं, ये नामुराद अश्क़ भी,
कहीं ज़ाहिर न कर दें तेरी गम_ए_दास्ताँ को,
बड़ा संभाल के रखना इन अश्कों को।
जब तक सीने में हैं तेरे हैं,
बाहर निकलते ही बेगाने हो जाएंगे,

#शांडिल्य

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