Friday, December 26, 2025
भींगे नयन पोल खोलते
मन में आकुलता बाकी है
व्यथित हृदय है, सूनी आँखें
थोड़ी व्याकुलता बाकी है
संदर्भ पुराने छूट गये
तृष्णा मन में बाकी है
नश्वरता को ढ़ूँढ़ेगा मन
एक मृगतृष्णा बाकी है
मरुभूमि में फूल खिला दूँ
मन की प्यास अभी बाकी है
#शांडिल्य
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