Tuesday, January 6, 2026

मैं लिखता हूँ कि मुझे लिखना नहीं था,  
शब्द मेरी नसों में अंधकार की धाराएँ बन गए।  
मैं जीता हूँ कि मुझे जीना नहीं था,  
हर साँस मुझे शून्य की ओर धकेलती रही।  

मैं मरता हूँ कि मुझे मरना नहीं था,  
मृत्यु भी मेरी प्रतीक्षा में थक गई।  
मैं थक गया था खुद से हार कर,  
हार ने मुझे अपनी ही परछाई बना लिया।  

मैं जो हूँ,वो मेरी चाह का प्रतिबिंब नहीं,  
मैं जो बन गया,वो मेरी भूल का परिणाम नहीं।  
मैं बस एक शून्य हूँ,
जिसमें सवाल और जवाब दोनों ही डूब चुके हैं।  

#शांडिल्य

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