जब तेरे होंठों पर
वो मधुप्रिया मुस्कान सजी होती है,
तो लगता है जैसे
कायनात का हर रंग
अपना अस्तित्व खो बैठा हो।
तेरे इस मृदुल हास्य-संगीत पर
प्रकृति भी मानो इतराती है
और शायद!
हंसी की मधुर लहरियों में
फूल भी अपनी सुवास
जलन में समर्पित कर देते होंगे।
#शांडिल्य
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