Monday, May 4, 2026

जब तेरे होंठों पर
वो मधुप्रिया मुस्कान सजी होती है,
तो लगता है जैसे
कायनात का हर रंग 
अपना अस्तित्व खो बैठा हो।

तेरे इस मृदुल हास्य-संगीत पर
प्रकृति भी मानो इतराती है
और शायद!
हंसी की मधुर लहरियों में
फूल भी अपनी सुवास 
जलन में समर्पित कर देते होंगे।

#शांडिल्य

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