Wednesday, May 13, 2026

ए सुनो !

तुम्हारा एक आलिंगन
मेरी संज्ञानात्मक पीड़ा को मेरे देहकाय से फोड़कर
क्षितिज के पार अनंत शून्य में विसर्जित कर देता है।

तुम्हारा एक आलिंगन
मेरी कुम्हलाया आत्मा और ऊर्जा को
पुनः उल्लासपूर्ण करता है—
सजीव, दिव्य और अनंत प्राणवान!

और मैं कहूँ तो…
तुम्हारे आलिंगन की छाया
मेरी रूह में बसती है,
जैसे सूरज की पहली किरण
भोर के अँधियारे को चीरती है"! ♥️🌼

#शांडिल्य

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