Tuesday, June 16, 2026

लेखक की दिनचर्या........✍️
सुबह की धूप में नहीं,
स्याही की महक में खिलती है।
जहाँ दुनिया रोटियाँ गिनती है,
लेखक ख्वाहिशें गिनता है—
शब्दों के पन्नों पर।

लेखक का भोजन —
कभी चाय की चुस्की,
कभी दर्द की घूँट, 
और कभी तन्हाई का निवाला होता है।

लोग समय काटते हैं,
लेखक समय से लड़ता है,
ताकि एक पंक्ति उसके होने की गवाही दे सके।"
"लेखक की थकान—
नींद से नहीं मिटती, 
बल्कि अधूरी कहानियों से मिटती है।

#शांडिल्य

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