Thursday, May 5, 2016

हम भी दुश्मन से हो गए अपने
आपने जबसे दोस्ती कम की है
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फिराक

Wednesday, May 4, 2016

न गुल अपना न खार अपना, न जालिम बागबाँ अपना,
बनाया आह किस गुलशन में हमने आशियाँ अपना।


ऐ दोस्त मिट गया हूँ फना हो गया हूँ मैं
इस दौर ऐ दोस्ती की दवा हो गया हूँ मैं |


इसे ख़ुलूस कहो, या फिर मेरी नादानी
जो भी मुस्कुरा के मिला, उससे दोस्ती करली.

Monday, May 2, 2016

तुम्हारी दोस्ती को देख कर सब हमसे रश्क करते हैं
जो बस चलता तो दुनिया छीन लेती ज़िन्दगी मेरी

ऐ दोस्त तेरी दोस्ती के लिए दुनिया छोड़ देंगे हम ,
तेरी तरफ आये हर तूफ़ान को मोड़ देंगे हम ,
लेकीन तुने जो साथ छोड़ा हमारा ,
कसम से तेरे बिना मर जायेगे हम .

ये और बात है मजबूरियों ने निभाने ना दी दोस्ती
वरना शामिल सच्चाई मेरी वफाओं में आज भी है
दोस्ती और वफा सिर्फ मजबूरियां थी तुम्हारे लिए
तुम क्या जानो, क्या-क्या ख्वाब थे दिल मे हमारे॥