Saturday, July 16, 2022

 जब मन कि कोई भी बात हो

या दिल में भरा कोई जज्बात हो ।


जो पल-पल तुम्हें सताते हो

और आंखों को नम कर जाते हो ।


उन बेचैनी की बातों को

उन दर्द भरी मुलाकातो को ।


लिख दो लहू से दिल के पन्नों पर

एक कलम बना कर  यादों को ।


शायद कुछ सुकून मिले तुम्हें

भूल पाओ उन लम्हों को ।।


---- सुनिल #शांडिल्य

Friday, July 15, 2022

 कुछ कहे, अनकहे, कुछ हृदय में रहे,

इस निशा के भंवर में समाते रहे।


चांद छिपने लगा, रात के पग थमे,

किन्तु अपने हृदय, गुनगुनाते रहे ।


प्रेम का ज्वार, यूंही घुमड़ता रहा,

सपन अनगिने, लहलहाते रहे।


दो तुम्हारे नयन, दो हमारे नयन,

चार दीपक सदा, जगमगाते रहे।


---- सुनिल #शांडिल्य

Thursday, July 14, 2022

 कभी कभी खुशी से

बांटना जज्बात जरुरी है

दिल में दबी हो वर्षों से

कहना बात जरूरी है!!


मन की बातों में

हजार राज छुपे होते हैं

निराशा के सन्नाटों में

मोहक आवाज छुपे होते हैं !!


मन की बातें कहने से

मन  हल्का होता है

बोझिल मन पर हावी 

नहीं कुछ कल का होता है !!


---- सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, July 13, 2022

 तेरी मीठी मीठी बात

तेरी अनचाही मुलाकात।

तेरी खिली खिली सौगात

तुम तो रब से भी प्यारी हो।


होठों पर तेरी मधुशाला, 

लवों पर तेरी मुस्कान। 

तेरी अमृत जैसी बोली, 

तेरी कोयल जैसी तान।


उड़े जुल्फें जब चले तू

हो बिन बादल बरसात।

तेरी मीठी मीठी बात। 

तुम तो रब से भी प्यारी हो।


---- सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, July 12, 2022

 काली~काली आँखें ...,

लाल सूर्ख होंठ ....


हल्के गुलाबी गाल .....

माथे पे चांदी सी चमक ....


गोरे रंग में ये बदन 

हल्की लालिमा लिये हुए ....!


क्या खूब है ...

सारे रंग एक ही केनवास पर उतार दिये !


शायद ....


खुदा ने तुम्हे बनाने से पहले ...

रंगोली बनाई होगी ....!!


---- सुनिल #शांडिल्य

Monday, July 11, 2022

 सांस-साँस तेरी गीत बनी है 

हर धड़कन है सरगम। 


बंद पलक है निशा घनेरी,

खुले नयन प्रभात हैं हरदम। 


नेह निमंत्रण देती लगती अक्सर 

तेरी चितवन मुझको,


अपनी प्रीत रूप में सौंपी है तूने 

भेंट ये अद्भुत अनुपम। 


---- सुनिल #शांडिल्य

Saturday, July 9, 2022

 ह्रदय से तुम्हारे  मिलन  कर  रहा  हूँ

तेरी धड़कनों पर गज़ल लिख रहा हूँ


पहाड़ों से आती ये चंचल हवायें

बदन से  तुम्हारे  आँचल  उड़ायें

छूकर बदन को मेरे  पास  आयें

आकर मुझे भी  दीवाना  बनायें


हवाओं को दिल से नमन कर रहा हूँ

तेरी धड़कनों पर गज़ल लिख रहा हूँ


---- सुनिल #शांडिल्य