Monday, February 6, 2023

तेरे बारे में क्या लिखूं
तुझे सोचूँ तो
ख्वाब बन जाते हो..
तुझे देखूं तो
सपना...
तुझे छू लूँ तो
ख्वाहिश बन जाते हो..
तुझे मांगू तो
मन्न्त...
तुझसे बात करूं तो...
आदत बन जाते हो
तुझे पा लूँ तो
जन्न्त
और
तेरे बारे में क्या लिखूं
तुझे जी लूँ तो
जिंदगी बन जाते हो...!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य
जिंदगी चल रही है 
आहिस्ता आहिस्ता
सांसो से सांसो की गुफ्तगूं
आहिस्ता आहिस्ता

नादान से सवाल है दिल से
क्यों गम ही गम सिमट रहा जिंदगी में
आहिस्ता आहिस्ता

बहुत फलसपां सुना था ऐ जिंदगी
जब रुबरु हुए तुझसे
आहिस्ता आहिस्ता

उम्मिदों का साया लिपट गया
कफन से आहिस्ता आहिस्ता

मेरे दर्दो गम में किसी का साथ नहीं,
खुशियों में साथ देने वाले चल दिए
आहिस्ता आहिस्ता...

ये मौसम का सितम था या उनका,
मिजाज बदला भी तो 
आहिस्ता आहिस्ता....

~~~~ सुनिल #शांडिल्य
आँखों में आँसू और मुस्कुराना लिखेंगे,
ख्वाब ख्वाहिश अफ़साना लिखेंगे |

इतनी जल्दी हार मान जाएं मुमकिन नहीं,
हर पन्ने पर हँसी का ख़ज़ाना लिखेंगे |

उम्मीदों पर ग़र टिकी है दुनिया तो टिकी रहने दो,
साथ उम्मीदों के हम भी निभाना लिखेंगे |

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, February 4, 2023

एक नशा सा मुझमे जगाने लगी.. हैं तेरी सादगी ...
क्या ये भी अदाओं का हिस्सा ही..हैं तेरी सादगी
अश्क जब लाती हो आँखो में ....तुम अपने 
ये छलकते जाम ओर बढ़ा जाती..हैं तेरी सादगी 
देख तुझे आत्मीयता का एहसास होता हैं मुझे 
शिवालयो में बजे पवित्र शंख सी ..हैं तेरी सादगी 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य
तुम्हें आया ही नहीं पढ़ना , 
ये आंखें खुली किताब थी मेरी ,, 
तुम खामखां......
अलफ़ाजों में ही उलझे रहे ....
ये खामोशियाँ लाजवाब थी मेरी .....
आया ना हमको प्यार जताना...
प्यार कभी से तुझे करते हैं....
भोलापन तेरा भा गया हमको....
सादगी पर तेरी मरते हैं....
तेरी याद में ज़रा आँखें भिगो लूँ
उदास रात की तन्हाई में सो लूँ

अकेले ग़म का बोझ अब संभलता नहीं
अगर तू मिल जाये तो तुझसे लिपट कर रो लूँ

तेरी सादगी तेरे ख्याल,
तेरी हर अदा कमाल है,

मुझे फख्र है, मुझे नाज़ है,
कि तू सबसे अलग और बेमिसाल है 

आंसुओं की बूँदें हैं या आँखों की नमी है
न ऊपर आसमां है न नीचे ज़मी है

यह कैसा मोड़ है ज़िन्दगी का
उसी की ज़रूरत है और उसी की कमी है

नींद आएगी नहीं उसे किसी भी सूरत में 
आँखों में बे-हिसाब मेरे ख्वाब रखता है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य
 सादगी तुम्हारी हम को लुभा_रही है
उसपे ये शब सुहानी दिल को जला रही है।।
होठों पे जाने कब से हर बात थे दबाए
खामोशियों के किस्से धड़कन सुना_रही है।।
वो शाम ज़िन्दगी की हर धुन सुना_रही थी
ये शाम विरह वाली हमको रूला_रही है।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य