फूल अपने कल से बेखबर ,
जिंदगी के हर पल कों डाल पर जीता हैं.
अपने रंगों ओर नाजुकता मे मुस्कराता हैं,
ओरो पर ख़ुशी का नूर चढ़ाता हैं.
फूलो की चाहत कुछ पल तक सिमित होती हैं,जिस पल मे औस की बुँदे प्रेम का राग धोहती हैं.
खुदा भी धुप की किरणों से मिलन का राह हो लेती हैं,
उस पल तो फूल अपने उलास मे सव भूल बाट जोहता हैं
जिंदगी के हर पल कों डाल पर जीता हैं.
अपने रंगों ओर नाजुकता मे मुस्कराता हैं,
ओरो पर ख़ुशी का नूर चढ़ाता हैं.
फूलो की चाहत कुछ पल तक सिमित होती हैं,जिस पल मे औस की बुँदे प्रेम का राग धोहती हैं.
खुदा भी धुप की किरणों से मिलन का राह हो लेती हैं,
उस पल तो फूल अपने उलास मे सव भूल बाट जोहता हैं

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