Friday, June 5, 2015

जी भर के निहारा सराहा खूब मेरी सीरत को
छुआ, सहलाया और पुचकारा मेरे सपनों को
जब मैं डूब गया तुम्हारे दिखाये सपनों के सागर में
मदहोशी की हद तक
तब अचानक!
तुम्हारा दावा है तुमने नहीं दिखाये सपने
क्या तुम बोल सकती हो कोई इससे बड़ा झूठ?

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