आप से गिला आप की क़सम
सोचते रहें कर न सके
हम
उस की क्या ख़ता लदवा
है गम़
क्यूं गिला करें
चारागर से हम
ये नवाज़िशें और ये
करम
फ़र्त-व-शौक़ से मर न
जाएं हम
खेंचते रहे उम्र भर
मुझे
एक तरफ़ ख़ुदा एक तरफ़
सनम
ये अगर नहीं यार की गली
चलते चलते क्यूं स्र्क
गए क़दम
सबा सिकरी
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